फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एम विजयन: कभी स्टेडियम में बेचा करते थे सोडा, अब पद्मश्री के लिए नाम भेजेगा फुटबॉल संघ

Wed, 17 Jun 2020 04:57 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
आईएम विजयन - फोटो : ट्विटर
विज्ञापन

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने पूर्व कप्तान आईएम विजयन के नाम की सिफारिश देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री के लिए की है। पूर्व भारतीय स्ट्राइकर विजयन (51 वर्ष) ने भारत के लिए 90 के दशक में पदार्पण करने के बाद 79 मैचों में 40 गोल दागे, उन्हें 2003 में अर्जुन पुरस्कार दिया गया था।

विज्ञापन


1993, 1997 और 1999 में भारत का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार तक पा चुके विजयन पर एआईएफएफ के महासचिव कुशल दास ने पीटीआई को बताया कि, 'हां, हमने नाम पद्मश्री के लिए गृह मंत्रालय भेजा है।'

विजयन ने 2000 से 2004 तक भारतीय टीम की अगुआई की। उनकी साथी स्ट्राइकर बाईचुंग भूटिया के साथ जोड़ी बेहतरीन हुआ करती थी। क्लब स्तर पर वह मोहन बागान, केरल पुलिस और अब बंद कर दिए गए एफसी कोच्चि और जेसीटी मिल्स फगवाड़ा के लिए खेले थे, उन्हें 1999 के सैफ खेलों में भूटान के खिलाफ एक मैच में 12 सेकेंड में सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोल करने का श्रेय दिया जाता है और वह 2003 में भारत में हुए एफ्रो एशियाई खेलों में चार गोल करके शीर्ष स्कोरर रहे थे।
विज्ञापन


यह उनका देश के लिए अंतिम टूर्नामेंट था, जिसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया था। विजयन अपने गृहनगर त्रिचूर के कोरपोरेशन स्टेडियम में फुटबॉल मैचों के दौरान सोडा बेचा करते थे, उन्होंने 17 साल की उम्र में केरल पुलिस फुटबॉल क्लब के लिए बतौर स्ट्राइकर करियर शुरू किया था। संन्यास के बाद उन्होंने अपने गृह नगर में युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के लिए फुटबॉल अकादमी खोली।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें