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Explainer: इंग्लैंड जीता हुआ मैच कैसे हारा, टुकेल की कौन-सी गलती पड़ी भारी? मेसी को रोकना नहीं हो पाया मुमकिन

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 16 Jul 2026 09:35 AM IST

सार

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने एक समय अर्जेंटीना पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया था, लेकिन 39 साल के लियोनल मेसी के दो असिस्ट और इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल की  रणनीति ने मैच का पूरा रुख बदल दिया। अब फाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा।
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केन-बेलिंगहम, मेसी और थॉमस टुकेल - फोटो : FIFA.COM
लियोनल मेसी पर सवाल उठाने वाले शायद एक बार फिर गलत साबित हुए। 39 साल की उम्र में भी अर्जेंटीना के कप्तान ने दिखा दिया कि महान खिलाड़ी सिर्फ गोल नहीं करते, बल्कि बड़े मुकाबलों का परिणाम भी तय करते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मेसी ने गोल नहीं किया, लेकिन दो असिस्ट देकर अर्जेंटीना को 2-1 की रोमांचक जीत दिलाई और लगातार दूसरी बार और अपनी कप्तानी में तीसरी बार टीम को विश्व कप फाइनल में पहुंचा दिया। हालांकि, यह सिर्फ मेसी की शानदार फुटबॉल समझ की कहानी नहीं थी। यह इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल की उस रणनीतिक गलती की भी कहानी थी, जिसने जीत की दहलीज पर खड़ी टीम को हार की तरफ धकेल दिया।


 
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केन-बेलिंगहम, मेसी और थॉमस टुकेल - फोटो : FIFA.COM
लियोनल मेसी पर सवाल उठाने वाले शायद एक बार फिर गलत साबित हुए। 39 साल की उम्र में भी अर्जेंटीना के कप्तान ने दिखा दिया कि महान खिलाड़ी सिर्फ गोल नहीं करते, बल्कि बड़े मुकाबलों का परिणाम भी तय करते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मेसी ने गोल नहीं किया, लेकिन दो असिस्ट देकर अर्जेंटीना को 2-1 की रोमांचक जीत दिलाई और लगातार दूसरी बार और अपनी कप्तानी में तीसरी बार टीम को विश्व कप फाइनल में पहुंचा दिया। हालांकि, यह सिर्फ मेसी की शानदार फुटबॉल समझ की कहानी नहीं थी। यह इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल की उस रणनीतिक गलती की भी कहानी थी, जिसने जीत की दहलीज पर खड़ी टीम को हार की तरफ धकेल दिया।


 

इंग्लैंड के कोच टुकेल और अर्जेंटीना के कोच स्कालोनी - फोटो : FIFA.com
55 मिनट तक इंग्लैंड का था पूरा नियंत्रण, फिर क्या हुआ?
 
  • सेमीफाइनल की शुरुआत से ही इंग्लैंड ने तेज गति और आक्रामक खेल से अर्जेंटीना को परेशान किया। पहले हाफ में दोनों टीमों ने एक-दूसरे को ज्यादा मौके नहीं दिए। मुकाबला शारीरिक टक्कर, कड़े टैकल और जबरदस्त संघर्ष से भरा रहा।
  • 55वें मिनट में मॉर्गन रोजर्स के शानदार क्रॉस पर एंथनी गॉर्डन ने गोल कर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। उस समय तक लग रहा था कि थॉमस टुकेल की टीम विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली है।
  • दूसरी ओर अर्जेंटीना भी मुश्किल स्थिति में था। उसके दोनों सेंटर बैक लिसांद्रो मार्टिनेज और क्रिस्टियन रोमेरो पहले से यलो कार्ड देख चुके थे। इंग्लैंड यदि लगातार आक्रमण करता तो अर्जेंटीना की मुश्किलें और बढ़ सकती थीं।

मैजिकल मेसी - फोटो : ANI
कहां टुकेल ने कर दी सबसे बड़ी गलती?
 
  • बढ़त मिलने के बाद इंग्लैंड ने आक्रमण जारी रखने के बजाय खुद को बचाने की रणनीति अपनाई। 72वें मिनट में गोल करने वाले एंथनी गॉर्डन को बाहर कर उनकी जगह डिफेंडर एज्री कॉन्सा को उतार दिया गया। इसके बाद टीम पांच डिफेंडरों के साथ खेलने लगी।
  • 82वें मिनट में टुकेल ने एक और रक्षात्मक बदलाव किया। उन्होंने रीस जेम्स और डेक्लान राइस को बाहर कर डैन बर्न और निको ओ'राइली को मैदान में उतार दिया। इन बदलावों ने साफ संकेत दे दिया कि इंग्लैंड अब दूसरा गोल करने नहीं, बल्कि किसी तरह बढ़त बचाने की कोशिश कर रहा है। यही फैसला अंत में सबसे भारी साबित हुआ।

मेसी और अर्जेंटीना ने कैसे बदली कहानी?
 
  • इंग्लैंड के पीछे हटते ही अर्जेंटीना ने गेंद पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया। मेसी लगभग हर हमले की शुरुआत कर रहे थे। उन्होंने जल्दबाजी में शॉट लगाने के बजाय धैर्य के साथ मौके बनाए और लगातार इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति की परीक्षा ली।
  • 85वें मिनट में मेसी ने दाईं ओर से गेंद संभाली। सभी को लगा कि वह अपने पसंदीदा बाएं पैर से शॉट लगाएंगे, लेकिन उन्होंने खाली खड़े एंजो फर्नांडीज को शानदार पास दिया। फर्नांडीज ने बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह गोल अर्जेंटीना के लिए सिर्फ बराबरी नहीं, बल्कि मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड - फोटो : FIFA.COM
स्टॉपेज टाइम में कैसे चला मेसी का जादू?
 
  • बराबरी के बाद अर्जेंटीना का आत्मविश्वास बढ़ गया, जबकि इंग्लैंड दबाव में आ गया। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेसी ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाई।
  • उन्होंने दाईं ओर से अपने कमजोर माने जाने वाले दाएं पैर से सटीक क्रॉस डाला। जॉन स्टोन्स अपने खिलाड़ी को मार्क करने में चूक गए और लौटारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर लगाकर अर्जेंटीना को 2-1 की अविश्वसनीय जीत दिला दी।
  • ऑप्टा के आंकड़ों के अनुसार, एंथनी गॉर्डन के गोल (55वें मिनट) से लेकर लौटारो मार्टिनेज के विजयी गोल (90+2 मिनट) तक इंग्लैंड के पास केवल 12 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रहा।
  • यानी 55वें मिनट में एंथनी गॉर्डन के गोल के बाद, मैच के 56वें मिनट से इंग्लैंड के पास औसतन सिर्फ 12 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रहा, जबकि अर्जेंटीना ने 88 प्रतिशत समय तक गेंद अपने नियंत्रण में रखी।
  • यह बताने के लिए काफी है कि बढ़त मिलने के बाद इंग्लैंड ने किस तरह पूरा मैच अर्जेंटीना के हवाले कर दिया।
 

अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड - फोटो : FIFA.COM
39 की उम्र में भी मेसी क्यों हैं सबसे अलग?
 
  • विश्व कप शुरू होने से पहले कई लोगों ने सवाल उठाए थे कि क्या मेसी अब भी सबसे बड़े मंच पर मैच जिता सकते हैं। लेकिन उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में हर आलोचना का जवाब दिया।
  • इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने नौ सफल ड्रिब्लिंग कीं, दो असिस्ट दिए और लगातार 13वें मैच में गोल या असिस्ट का योगदान दिया।
  • अब वह अर्जेंटीना को अपनी कप्तानी में तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचा चुके हैं। यदि वह फाइनल खेलते हैं तो ब्राजील के महान कप्तान काफू के बाद विश्व कप के तीन फाइनल खेलने वाले दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे।

हैरी केन और वेन रूनी ने क्या कहा?
मैच के बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने हार की सबसे बड़ी वजह स्वीकार की। उन्होंने कहा, 'जैसे ही हम 1-0 से आगे हुए, हमने सिर्फ बढ़त बचाने की कोशिश शुरू कर दी। इस स्तर पर ऐसा करना काफी नहीं होता।' केन का यह बयान इंग्लैंड की पूरी रणनीति की कहानी बयां करता है। इसके अलावा इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वेन रूनी ने भी कहा है कि टुकेल ने जो मैदान पर बदलाव किए, वो सबसे बड़ी गलती थी। उससे टीम को कोई फायदा नहीं हुआ।

अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड - फोटो : FIFA.COM
स्पेन के सामने मेसी की सबसे बड़ी परीक्षा
 
  • अब अर्जेंटीना का सामना फाइनल में स्पेन से होगा। एक ओर 39 वर्षीय मेसी होंगे, जो अपने करियर में एक और विश्व कप जोड़कर इतिहास रचना चाहेंगे, तो दूसरी ओर स्पेन की युवा टीम होगी, जिसकी अगुआई लामिन यमाल जैसे उभरते सितारे कर रहे हैं।
  • इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेसी को पूरे मैच में रोक पाना लगभग असंभव है। उन्हें एक मौका भी मिला तो वह मैच की कहानी बदल सकते हैं। दूसरी तरफ, इंग्लैंड के लिए यह हार लंबे समय तक उस मुकाबले के रूप में याद की जाएगी, जिसमें उसने विरोधी से कम और अपनी रणनीति से ज्यादा हार झेली।
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