वर्ल्ड कप में जर्मनी vs पुर्तगाल मैच की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही थी, लेकिन इस मैच में पहले मिनट से ही सिर्फ जर्मनी का दबदबा रहा। थॉमस मूलर ने टूर्नामेंट की पहली हैट्रिक बनाई जबकि मैट्स हृयूमेल्स ने भी पुर्तगाल के डिफेंस को भेदते हुए गोल किया।
हालांकि यह कहा जाना चाहिए कि जिस पेनल्टी के दम पर जर्मनी ने पहला गोल किया, उसे पूरी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
जाओ पेरेरिया ने फाउल किया था, लेकिन बेयर्न म्यूनिख के मिडफील्डर मारियो गोट्जे ने कुछ ज्यादा ही नाटक कर के दिखाया और सर्बिया के रेफरी ने उन्हें पेनल्टी दे दी।
2010 के वर्ल्ड कप में पांच गोल करने वाले मूलर ने बिना किसी परेशानी के गोल किया और इसके बाद जर्मनी ने रुकने का नाम नहीं लिया। वास्तव में जर्मनी की ओर से यह काफी मजबूत शुरुआत थी।
पेपे गलत कारणों की वजह से चर्चा में
पेपे गलत कारणों की वजह से चर्चा में बने। 38वें मिनट में उन्होंने मूलर को सिर से मारा, जिस वजह से उन्हें रेड कार्ड मिल गया। इसकी कोई जरूरत नहीं थी, वो भी तब जब पुर्तगाल 0-2 से पिछड़ा हुआ था।
उनके मूर्खतापूर्ण व्यवहार को देखकर सच में काफी गुस्सा आया। यह सच है कि इस मामले में मूलर की भूमिका कम नहीं थी, लेकिन पेपे ने जो किया, उसकी कोई जरूरत नहीं थी।
उनके गैर पेशेवर रवैये ने पुर्तगाल के मैच में वापसी के रास्ते ही बंद कर दिए लेकिन जर्मनी ने शानदार खेल दिखाया। कई मायनों में इस मैच ने मुझे 2010 के क्वार्टर फाइनल की याद दिला दी, जब अर्जेंटीना भी उनसे इसी अंतर से हारा था।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो को खेलने का मौका नहीं दिया गया। उनके लिए बेहद मजबूत किलेबंदी की गई थी। बाकी मैचों में उन्हें अपनी टीम को प्रेरणा देनी होगी। स्पेन का सामना चिली से होगा। यह मैच स्पेन का खिताब बरकरार रखने का सपना तोड़ सकता है।
चिली ने आस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर महत्वपूर्ण अंक हासिल किए हैं। अगर स्पेन के पुराने योद्धा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं, तो वह वापसी कर सकते हैं। डेल बॉस्क्यू को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा और कोक जैसे खिलाड़ी को मौका देना होगा।