कारपेट उठा ले गया फैन, निराशा की हद
हंगामे के बीच एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक फैन स्टेडियम का कारपेट कंधे पर उठाए नजर आया। रिपोर्टर के सवाल पर उसने कहा, 'मैंने टिकट के 10,000 रुपये दिए, लेकिन मेसी का चेहरा तक नहीं देख पाया। बस नेताओं के चेहरे दिखे। इसलिए यह कारपेट घर ले जा रहा हूं, प्रैक्टिस के लिए।' यह बयान उस गहरी निराशा का प्रतीक बन गया, जो आयोजन की विफलता से उपजी।
शादी छोड़कर आया फैन, खाली हाथ लौटा
भीड़ में एक और कहानी दिल को छू लेने वाली थी। एक प्रशंसक ने बताया कि उसी दिन उसकी शादी थी, लेकिन वह सब कुछ छोड़कर मेसी को देखने स्टेडियम पहुंचा। पीटीआई से बातचीत में उसने कहा, 'कोलकाता में सब जानते थे कि मेसी आ रहे हैं। मेरी शादी है, फिर भी मैं मेसी को देखने आया। इसके बावजूद मेरी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।' उसने यह भी माना कि मेसी की मौजूदगी भर से खुशी होती है, लेकिन आयोजन से उसे ऐसी निराशा की उम्मीद नहीं थी।
कोलकाता बनाम हैदराबाद: सबक साफ
हैदराबाद में मेसी करीब एक घंटे तक सहज दिखे, जो कोलकाता में दिखी घबराहट और कठोर माहौल से बिल्कुल अलग था। यह तुलना साफ करती है कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा कितनी निर्णायक होती है। एक ही टूर के दो शहर, दो अनुभव और फैंस के लिए दो बिल्कुल अलग यादें।