बेल्जियम की टीम शनिवार को जब ट्यूनीशिया के खिलाफ उतरेगी तो उसकी निगाह नॉकआउट राउंड में जगह पक्की करने पर होगी। ग्रुप में उसका मुकाबला इंग्लैंड से है और वह नहीं चाहेंगे कि अगले दौर के लिए उसका भाग्य अंतिम मैच पर आकर टिके। रेड डेविल्स के नाम से मशहूर बेल्जियम ने पहले मैच में पनामा को 3-0 से हराया था, जब रोमूलू लुकाकू ने दो गोल किए थे। उस मैच में उसके मुख्य स्ट्राइकर एडेन हेजर्ड की कड़ी मोर्चाबंदी की गई थी।
बेल्यिजम के कोच रोबर्टों मार्टिनेज को लगता है कि इस चेल्सी के खिलाड़ी हेजर्ड के खिलाफ शायद ट्यूनीशिया सारा फोकस हेजर्ड पर करने की गलती नहीं करेगी। हालांकि रोबर्टो इस बात को लेकर भी चिंतित है कि अगर विपक्षी टीम ने हेजर्ड पर अंकुश रखने के लिए रफ-टफ खेला तो उनके स्ट्राइकर को चोट भी लग सकती है जिससे भविष्य में टीम को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इतिहास बेल्जियम के साथ है। आज तक विश्व कप में कोई अफ्रीकी टीम बेल्जियम को नहीं हरा सकी है जबकि ट्यूनीशिया ने विश्व कप में किसी यूरोपियन टीम को आज तक नहीं हराया है। ट्यूनीशिया की रक्षक पंक्ति में अली मालाउल की जगह अनुभवी आउसामा हदादी का आना तय माना जा रहा है। मार्टिनेज मानते हैं कि उत्तरी अफ्रीकी टीम के खिलाड़ी काफी जांबाज है और जी-जान लगाकर खेलते हैं।
पनामा के खिलाफ लुकाकु और मार्टिन्स ने गोल किए थे लेकिन इस मैच में हेजार्ड अपनी लय पाना चाहेंगे। हेजार्ड के छोटे भाई थोरगन भी टीम में शामिल हैं। पिछले विश्व कप में बेल्जियम की टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी। बेल्यिजम के लिए यह अच्छी खबर है कि बार्सिलोना के सेंटर बैक थामस वर्मेलिन ने ट्रेनिंग शुरू कर दी है और मैनचेस्टर यूनाइटेड के कप्तान विन्सेंट कोम्पानी के भी इस मैच में लौटने की संभावना है। अफ्रीकी टीमों में मिस्र और मोरक्को बाहर हो चुकी हैं। अफ्रीकी टीमों में सेनेगल को छोड़कर बाकी टीमों का प्रदर्शन ज्यादा बढ़िया नहीं रहा है लेकिन ट्यूनीशिया की टीम बेल्जियम को आसानी से नहीं जीतने देगी। पहले मैच में ट्यूनीशिया को इंग्लैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।