फुटबॉल के सबसे बड़े उत्सव विश्व कप में यूरोप और दक्षिण अमेरिका का दबदबा रहता है। अभी तक आठ टीमों के बीच ही विश्व कप ट्रॉफी बंटी है। एशिया की भागीदारी तो रहती है, लेकिन दावेदारी में पिछड़ जाता है। 2002 में दक्षिण कोरिया ने सेमीफाइनल में पहुंचकर नई उम्मीद जरूर जगाई थी। पिछली बार एशिया की चार टीमों ने हिस्सा लिया था। इस बार पांच टीमें भाग ले रही हैं जिनमें ईरान, दक्षिण कोरिया, जापान, सउदी अरब और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। एशियाई टीम के लिए विश्व कप बड़ी अग्निपरीक्षा है।
दक्षिण कोरिया ने सबसे पहले 1954 में हिस्सा लिया था। 2002 में जापान के साथ संयुक्त रूप से विश्व कप की मेजबानी करने का गौरव भी हासिल है। दक्षिण कोरिया के ग्रुप में जर्मनी, मैक्सिको और स्वीडन शामिल हैं। टीम की कमान सुंग युइंग संभाल रहे हैं जिनका यह तीसरा विश्व कप है। स्टार स्ट्राइकर सोन हियुंग मिन भी हैं, जिन्होंने इस सीजन में टोटेनहम हॉटस्पर के लिए 18 गोल किए हैं। टीम के पास सुंग युइंग हैं जो सौ मैच खेल चुके हैं। नए कोच शिन तोई यिंग के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि उन्होंने पिछले कोच यूली की बर्खास्तगी के बाद दायित्व संभाला है।
श्रेष्ठ प्रदर्शन : सेमीफाइनल (2002), इस बार भागीदारी : 10, रैंकिंग : 57
जापान : सबसे पहले जापानी टीम 1998 में खेली थी। उसके बाद हर बार हिस्सा लिया। रूस में छठी बार खेलेगा। ग्रुप में कोलंबिया, पोलैंड और सेनेगल हैं। समुराई के नाम से मशहूर टीम ने 2002 में प्री क्वार्टर में हिस्सा लिया था। इजि कावाशिमा, केईयुस्के होंडा, युटो नागाटूमो, शिंजो ओकाजाकी और कप्तान माकोटो हासेबे पर बड़ी जिम्मेदारी है। टीम का ग्रुप मुश्किल माना जा रहा है लेकिन जापान उलटफेर करने में माहिर है।
श्रेष्ठ प्रदर्शन : प्री क्वार्टर (2002, 2010), इस बार भागीदारी : 06 बार, रैंकिंग : 61
ईरान : एशिया की श्रेष्ठ रैंकिंग की टीम ईरान है। उसके साथ ग्रुप में पूर्व विश्व चैंपियन और यूरोपियन चैंपियन पुर्तगाल है। सरदार अजमोन श्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। इसके अलावा सईद इजातोल्ही और मिलाद मोहम्मदी को रूस में लीग खेलने के अनुभव का फायदा मिल सकता है। टीम का रक्षण काफी मजबूत है, क्वालिफाइंग मैचों में सिर्फ पांच गोल खाए हैं। एशियाई फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) से ईरान ने ही सबसे पहले विश्व कप का टिकट कटाया।
श्रेष्ठ प्रदर्शन : अमेरिका के खिलाफ जीत (1998), इस बार भागीदारी : 04, रैंकिंग : 37
सउदी अरब : अब तक चार बार भाग ले चुकी सउदी अरब के ग्रुप में मेजबान रूस, मिस्र और उरुग्वे है। टीम नए कोच जुआन एंटोनिया पिज्जी के हवाले है। कप्तान ओसामा हवसावी के अलावा से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जा रही। दूसरे दौर में पहुंचने की उम्मीदें बेहद कम हैं। अब तक टीम ने विश्व कप में 13 मैच जीते हैं जिनमें उसे केवल दो बार जीत मिली है। दो मैच ड्रॉ रहे हैं और नौ में हार मिली है। अनुभव की कमी टीम को खल सकती है। पिछले दो विश्व कप में टीम क्वालिफाई नहीं कर पाई थी। टीम के पास मोहम्मद अल सहयावी और याहया अल शेहरी के रूप में दो मजबूत खिलाड़ी हैं।
श्रेष्ठ प्रदर्शन : प्री क्वार्टर (1994), इस बार भागीदारी : 05वीं बार, रैंकिंग : 67
ऑस्ट्रेलिया : पिछली बार विश्व कप में टीम का प्रदर्शन खराब रहा था। सारे मैच हारी थी। इस बार विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाली 31वीं टीम रही। प्लेऑफ में होंडूरास को हराया था। ग्रुप में फ्रांस, पेरू और डेनमार्क हैं। कप्तान मिले जेडिनाक एस्टन विला क्लब के लिए खेलते हैं। मिडफील्डर ऍरान मूये और गोलकीपर मैट रेयान से टीम की उम्मीदें जुड़ी हैं। टीम की रैंकिंग बेहतर है। ग्रुप दौर से आगे जा सकती है।
श्रेष्ठ प्रदर्शन : प्री क्वार्टर (2006), इस बार भागीदारी : 05, रैंकिंग : 36