Explainer: अर्जेंटीना-मिस्र मुकाबले में क्या VAR के फैसले सही थे या उठते सवाल जायज हैं? दो फैसलों से पलटा मैच
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, डलास
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 08 Jul 2026 12:07 PM IST
सार
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना की 3-2 की जीत के बाद मिस्र ने रेफरी और VAR पर गंभीर सवाल उठाए। मोस्तफा जिको का रद्द किया गया गोल और पेनल्टी अपील खारिज होने से विवाद गहरा गया। हालांकि रेफरिंग विशेषज्ञ इन फैसलों को नियमों के मुताबिक सही मानते हैं। यह एक्सप्लेनर पूरे विवाद के दोनों पक्षों को समझाता है।
फीफा विश्वकप 2026
- फोटो : ANI
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेला गया मुकाबला सिर्फ अर्जेंटीना की 3-2 से ऐतिहासिक वापसी के लिए ही नहीं, बल्कि रेफरी और वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) के फैसलों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया। मिस्र, जो 78वें मिनट तक 2-0 से आगे था, हार के बाद खुलकर रेफरिंग पर सवाल उठाने लगा। कोच होसाम हसन ने मैच के बाद आरोप लगाया कि रेफरी और VAR टीम ने पूरे मैच में अर्जेंटीना का पक्ष लिया। हालांकि फुटबॉल विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। आइए समझते हैं कि आखिर विवाद किन दो फैसलों पर हुआ।
फीफा विश्वकप 2026
- फोटो : ANI
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेला गया मुकाबला सिर्फ अर्जेंटीना की 3-2 से ऐतिहासिक वापसी के लिए ही नहीं, बल्कि रेफरी और वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) के फैसलों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया। मिस्र, जो 78वें मिनट तक 2-0 से आगे था, हार के बाद खुलकर रेफरिंग पर सवाल उठाने लगा। कोच होसाम हसन ने मैच के बाद आरोप लगाया कि रेफरी और VAR टीम ने पूरे मैच में अर्जेंटीना का पक्ष लिया। हालांकि फुटबॉल विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। आइए समझते हैं कि आखिर विवाद किन दो फैसलों पर हुआ।
1. मोस्तफा जिको का रद्द किया गया गोल
पहला बड़ा विवाद तब हुआ जब मिस्र 1-0 से आगे था। मोस्तफा जिको ने शानदार काउंटर अटैक के बाद गोल दागकर टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। लेकिन VAR ने रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर को मॉनिटर पर बुलाया। रिप्ले देखने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। उनका मानना था कि गोल बनने से पहले मिस्र के मिडफील्डर मरवान अतिया ने लिसांड्रो मार्टिनेज की जर्सी खींची और उनके जूते पर कदम रखा था।
यहीं से विवाद शुरू हुआ। यह फाउल मिस्र के अपने हाफ में हुआ था, जबकि उस समय अर्जेंटीना आक्रमण कर रहा था। मिस्र ने वहीं से गेंद छीनी और लगभग पूरे मैदान (करीब 100 गज) की दौड़ लगाकर गोल कर दिया। आलोचकों का कहना था कि VAR ने लगभग 10 सेकंड पहले हुई घटना तक जाकर गोल रद्द किया, जो जरूरत से ज्यादा पीछे लौटना था। हालांकि, जिको ने कुछ मिनट बाद फिर गोल कर टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी, लेकिन फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पहला गोल भी मान्य रहता तो स्कोर 3-0 हो सकता था और अर्जेंटीना की वापसी लगभग असंभव हो जाती।
2. मिस्र की पेनल्टी अपील क्यों खारिज हुई?
दूसरा और सबसे बड़ा विवाद अर्जेंटीना के तीसरे गोल से पहले हुआ। मिस्र ने पेनल्टी की दो अपीलें कीं। एक घटना में मोहम्मद सलाह पर जूलियन अल्वारेज के चैलेंज को लेकर सवाल उठे, जबकि दूसरी में जर्सी खींचने की शिकायत की गई। रेफरी ने दोनों मौकों पर खेल जारी रखा और VAR ने भी हस्तक्षेप नहीं किया। इसी फैसले ने मिस्र के खिलाड़ियों और कोच को सबसे ज्यादा नाराज किया।
आलोचकों का तर्क था कि जब VAR मिस्र के गोल को रद्द करने के लिए 100 गज पीछे तक जा सकता है, तो फिर अर्जेंटीना के बॉक्स में हुई जर्सी खींचने जैसी घटना की उसी गंभीरता से समीक्षा क्यों नहीं की गई? इसी कथित असंगति को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठे।
फुटबॉल विशेषज्ञों की राय क्या है?
- हालांकि कई पूर्व खिलाड़ियों और पंडितों ने VAR की एकरूपता पर सवाल उठाए, लेकिन कुछ रेफरिंग विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों विवादित फैसले तकनीकी रूप से सही थे। उनके अनुसार, मैक एलिस्टर और हम्दी फाथी के बीच जर्सी पकड़ने का संपर्क इतना गंभीर नहीं था कि पेनल्टी दी जाए। साथ ही उस समय गेंद दोनों खिलाड़ियों के प्रभाव क्षेत्र में भी नहीं थी। हालांकि, इस पर कुछ फैंस की राय अलग है और उनका मानना है कि हम्दी उस वक्त अटैक पर थे और तब जर्सी पकड़कर गिराने से गेंद उनके पजेशन से चली गई। पर रेफरी ने इस पर ध्यान तक नहीं दिया।
- इसी तरह निको गोंजालेज और मोहम्मद सलाह की घटना में विशेषज्ञों का कहना है कि अर्जेंटीना के खिलाड़ी ने पहले गेंद पर नियंत्रण हासिल किया था और उसके बाद हुआ संपर्क नियमों के अनुसार दंडनीय नहीं था। इसलिए VAR के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं थी। हालांकि, इस पर भी राय अलग है, क्योंकि नियंत्रण अर्जेंटीनी खिलाड़ी नहीं कर पाया था और सालाह से दूर जाते समय उसने अपने पैर को सालाह के पैर पर मारा था। सालाह भी गेंद से ज्यादा दूर नहीं थे और वो जैसे ही पीछे मुड़े उन्हें गिरा दिया गया। बॉक्स के अंदर आमतौर पर इसे फाउल माना जाता है।
विवाद क्यों बढ़ा?
मैच के दौरान मिस्र को कई फैसले अपने खिलाफ जाते हुए महसूस हुए। खिलाड़ियों को लगा कि अर्जेंटीना के कुछ फाउल पर कार्ड नहीं दिखाए गए और कई 50-50 फैसले भी मौजूदा विश्व चैंपियन के पक्ष में गए। जब इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडीज ने विजयी गोल किया तो मिस्र के खेमे का गुस्सा फूट पड़ा। कोच होसाम हसन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यहां तक कहा कि उनकी टीम के साथ अन्याय हुआ और VAR ने एक जैसे मामलों में अलग-अलग मानक अपनाए। नीचे एक्स के वीडियो में वो मौके दिखाए गए, जिसमें अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने साफतौर पर फाउल किया, पर रेफरी ने अनदेखा कर दिया।
क्या सच में मिस्र के साथ नाइंसाफी हुई?
- यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। मिस्र और उसके समर्थकों का मानना है कि VAR ने लगातार अर्जेंटीना को फायदा पहुंचाया। वहीं रेफरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि विवादित दोनों बड़े फैसले फीफा के नियमों के दायरे में सही थे।
- यानी बहस का केंद्र यह नहीं है कि VAR मौजूद था या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हर महत्वपूर्ण घटना पर एक जैसी गंभीरता और एक जैसे मानदंड अपनाए गए? यही सवाल इस मुकाबले को फीफा विश्व कप 2026 के सबसे चर्चित विवादों में शामिल कर चुका है।
- क्योंकि यही चीजें मिस्र के साथ भी हुई थीं। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने कभी हाथ जानबूझकर मिस्र के खिलाड़ियों के मुंह पर मारे, कभी जानबूझकर पैर मारा, पर रेफरी ने तो फाउल दिया और न ही कोई कार्ड दिखाया। पर जब लगा कि मैच अर्जेंटीना के दायरे से बाहर चुकी है तो रेफरी के भेदभाव ने माहौल को और गरमा दिया।