कतर में 22वां फुटबॉल विश्व कप खेला जा रहा है। इसमें दुनिया भर से 32 टीमों ने हिस्सा लिया है। पाकिस्तान विश्व कप में नहीं खेलने के बावजूद अपना योगदान दे रहा है। कश्मीर सीमा से सटे सियालकोट में कतर विश्व कप में इस्तेमाल हो रहे फुटबॉल को बनाया गया है। इस बार गेंद का आधिकारिक ने अल रिहाला है। विश्व कप की गेंदें एडिडास कंपनी की हैं।
2014 में ब्राजील और 2018 में रूस में हुए विश्व कप में भी पाकिस्तान में बने गेंद इस्तेमाल में लाए गए थे। इस बार भी यह परंपरा नहीं टूटी है। इस बार भी सियालकोट में गेंद बन रहे हैं। वह लगभग 60 हजार लोग यह काम करते हैं। यह शहर की जनसंख्या का करीब आठ फीसदी है। यहां बनी 80 फीसदी गेंदों में हाथ से सिलाई होती है। हाथ से बनी गेंदें ज्यादा स्थिर होती है। इसमें मशीनों से सिली जाने वाली गेंदों के मुकाबले ज्यादा तनाव होता है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेंद की सिलाई करने वालों को एक गेंद की मजदूरी के तौर पर करीब 160 रुपये दिए जाते हैं। एक गेंद को सिलने में तीन घंटे लगते हैं। गेंदों की सिलाई के काम में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतरीन गेंद सिलने वालों की भारी कमी है। इस कारण पहले की तुलना में अब ज्यादा मजदूरी दी जा रही है।
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गेंद को सिलने के बाद उसे साफ किया जाता है। फिर उसमें हवा भरा जाता है। फुटबॉल की गोलाई और परिधि की जांच के बाद क्वालिटी चेक का काम होता है। निर्माण के दौरान फुटबॉल का गहन परीक्षण किया जाता है।