विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा (FIFA) ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ/AIFF) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फीफा के नियमों और संविधान के गंभीर उल्लंघन की वजह से फीफा ने यह फैसला लिया। भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा है।
AIFF को सस्पेंड करने का मतलब है कि अंडर-17 महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप टूर्नामेंट, जो कि देश में 11 अक्तूबर से 30 अक्तूबर के बीच में आयोजित होने वाला था, अब तय समय पर नहीं होगा। साथ ही भारत को इसकी मेजबानी से भी हाथ धोना पड़ा है। जब तक यह बैन जारी रहेगा तब तक भारत की महिला और पुरुष फुटबॉल टीम कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल सकेगी। वहीं, किसी दूसरे देश की लीग में भी भारतीय खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत कब और कैसे हुई?
साल 2020
प्रफुल्ल पटेल
- फोटो : सोशल मीडिया
मामले की शुरुआत 2020 में ही हो गई थी। 2010 में एआईएफएफ के अध्यक्ष बने प्रफुल्ल पटेल का 12 साल का कार्यकाल 2020 में खत्म हो गया था। प्रफुल्ल पटेल ने तीन बार चार-चार साल का कार्यकाल पूरा किया था और फिर से अध्यक्ष के रूप में खड़े होने के योग्य नहीं थे। यह राष्ट्रीय खेल संहिता में निर्धारित कानूनों के अनुसार था। एआईएफएफ के चुनाव फीफा परिषद के सदस्य प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में दिसंबर 2020 तक होने थे, लेकिन इसके संविधान में संशोधन पर गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई।
18 मई, 2022
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 18 मई को एआईएफएफ को भंग कर दिया था और प्रफुल्ल पटेल और उनकी कार्यकारी समिति को जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने खेल को संचालित करने, एआईएफएफ के संविधान में संशोधन करने और 18 महीने से लंबित चुनाव कराने के लिए तीन सदस्यीय समिति की नियुक्त की थी।
18 मई, 2022
सुप्रीम कोर्ट
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सीओए में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एआर दवे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान भास्कर गांगुली शामिल हैं। प्रफुल्ल पटेल के हटने से फैन्स खुश थे और एक नए शासन के आने का स्वागत किया गया था।
29 मई, 2022
सीओए के सदस्य डॉ एस वाई कुरैशी ने कहा कि एआईएफएफ का नया संविधान सितंबर के अंत तक लागू हो जाएगा।
11 जून, 2022
भारतीय फुटबॉल टीम
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- सीओए और कुछ संबद्ध इकाइयों के सदस्य राष्ट्रीय खेल संहिता, फीफा और एएफसी कानून का पालन करते हुए एक संशोधित संविधान के तहत एआईएफएफ के चुनाव जल्द से जल्द कराने पर चर्चा करने के लिए मिले।
- फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने एएफसी महासचिव विंडसर जॉन के नेतृत्व में एक टीम को भारतीय फुटबॉल के हितधारकों से मिलने के लिए भेजा और एक रोडमैप तैयार किया था।
- एआईएफएफ के विभिन्न विभागों के दिन-प्रतिदिन के मामलों की देखरेख के लिए 12 सदस्यीय सलाहकार समिति नियुक्त की गई। सलाहकार समिति को सीओए के सभी सदस्यों को नियमित तौर पर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी दी गई।
- जो 12 सदस्यीय समिति बनाई गई उनमें रणजीत बजाज समेत सभी परिचित चेहरे शामिल थे। उस समिति को लगभग तुरंत भंग कर दिया गया था, क्योंकि फीफा तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के सख्त खिलाफ है।
23 जून, 2022
फीफा
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तीन दिन की बैठक के बाद, फीफा, एएफसी और एआईएफएफ के बीच 31 जुलाई तक नए संविधान को पूरा करने और सितंबर के अंत तक चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने का फैसला लिया जाता है।
6 जुलाई, 2022
सीओए संविधान के मसौदे के विभिन्न पहलुओं और सुझावों पर चर्चा करने के लिए एआईएफएफ के राज्य संघों का प्रतिनिधित्व करने वाली सात सदस्यीय समिति से मिलता है।
16 जुलाई, 2022
सीओए द्वारा तैयार एआईएफएफ का अंतिम मसौदा संविधान, मंजूरी के लिए सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत किया जाता है।
18 जुलाई, 2022
एआईएफएफ
- फोटो : prabhat khabar
- एआईएफएफ की राज्य इकाइयां संविधान के अंतिम मसौदे में कई प्रावधानों से नाखुश दिखीं। फिर भी वे फीफा के प्रतिबंध से बचने के लिए "बीच का रास्ता खोजने" के लिए तैयार हो गईं।
- सात सदस्यीय पैनल द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए राज्य संघों ने फीफा को लिखा था कि सीओए द्वारा तैयार अंतिम मसौदा संविधान के कई खंड भेदभावपूर्ण और अतार्किक थे।
21 जुलाई, 2022
- सुप्रीम कोर्ट प्रस्तावित संविधान में मतभेदों पर एआईएफएफ और राज्य संघों के लिए सीओए की याचिका पर सुनवाई करता है और सभी पक्षों को 25 जुलाई तक आपत्ति दर्ज करने का निर्देश देता है।
- यह संविधान के मसौदे पर चर्चा करने और राष्ट्रीय फुटबॉल निकाय के चुनाव का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उसी दिन इसकी पुष्टि करने के लिए अगली सुनवाई की तारीख 28 जुलाई निर्धारित करता है।
26 जुलाई, 2022
- फीफा ने एआईएफएफ को सिफारिश की कि सीओए द्वारा संविधान के मसौदे में निर्धारित 50 प्रतिशत के बजाय सह-चयनित सदस्यों के रूप में अपनी कार्यकारी समिति में 25 प्रतिशत प्रख्यात खिलाड़ी प्रतिनिधित्व करें।
- सीओए द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए संविधान के मसौदे में कहा गया था कि इलेक्टोरल कॉलेज में 36 राज्य संघों के प्रतिनिधि और पूरे भारत के 36 प्रख्यात फुटबॉल खिलाड़ी होंगे। इनमें 24 पुरुष और 12 महिला खिलाड़ी शामिल होंगे। इस पर फीफा ने आपत्ति जताई थी।
28 जुलाई, 2022
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने महिला अंडर -17 विश्व कप की मेजबानी को प्राथमिकता के रूप में रखते हुए एआईएफएफ चुनावों पर सुनवाई 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।
- मामले के मौजूदा न्यायाधीशों में से एक, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ का कहना था कि अदालत पूरी समिति को अंतिम रूप नहीं दे पाएगी, लेकिन वह चुनाव के लिए निर्देश जारी कर सकती है।
3 अगस्त, 2022
भारतीय फुटबॉल टीम
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- अक्तूबर 2022 में भारत में खेले जाने वाले महिला अंडर -17 विश्व कप के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफएफ को अपनी कार्यकारी समिति के लिए चुनाव जल्द से जल्द और अच्छी तरह से संपन्न कराने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया।
- इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी। 28 अगस्त को चुनाव कराने का कार्यक्रम तैयार किया गया। 29 अगस्त को परिणाम जारी करने की तारीख तय हुई।
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य फुटबॉल संघों के 36 प्रतिनिधियों और 36 प्रख्यात पूर्व फुटबॉल खिलाड़ियों से बना एक इलेक्टोरल कॉलेज बनाकर एआईएफएफ की कार्यकारी समिति के चुनाव कराने का निर्देश दिया।
5 अगस्त, 2022
भारतीय महिला फुटबॉल टीम
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- फीफा ने तीसरे पक्ष के प्रभाव के कारण एआईएफएफ को निलंबित करने और अक्तूबर में महिला अंडर -17 विश्व कप की मेजबानी के अधिकारों को छीनने की धमकी दी।
- फीफा का कहना था कि जून के बाद से सीओए विभिन्न हितधारकों के साथ बैठकें करने, नए चुनावों की रूपरेखा तैयार करने में सक्रिय था।
7 अगस्त, 2022
- सीओए ने धमकी के बाद फीफा को आश्वस्त किया कि वह एआईएफएफ को व्यवस्थित करने के लिए निश्चित रूप से तैयार है। साथ ही सीओए ने पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को फटकार भी लगाई।
- दरअसल, सीओए को सबूत मिले थे कि एआईएफएफ के पूर्व प्रमुख प्रफुल्ल पटेल एआईएफएफ के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे थे। पटेल ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के स्पष्ट उद्देश्य से देश के 35 सदस्य संघों के साथ बैठकें भी की थीं।
10 अगस्त, 2022
फीफा ने एआईएफएफ को सस्पेंड किया
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सीओए ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एआईएफएफ के पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और राज्य फुटबॉल संघों के कई पदाधिकारियों के खिलाफ 'न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप' करने के लिए अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन परसुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
13 अगस्त, 2022
एआईएफएफ के चुनाव से पहले अनुभवी प्रशासक सुब्रत दत्ता और लार्सिंग मिंग के नामांकन को चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर उमेश सिन्हा ने खारिज कर दिया। ये दोनों पहले तीन बार एआईएफएफ कार्यकारी समिति में रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय खेल संहिता के एक खंड के अनुसार, अगले चार साल के लिए किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए।
15 अगस्त, 2022
गियानी इन्फेंटिनो, फीफा अध्यक्ष
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फीफा भारतीय खेल मंत्रालय को सूचित करता है कि वह आगामी अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के चुनावों के लिए निर्वाचक मंडल में व्यक्तिगत सदस्यों को शामिल करने के विरोध में दृढ़ है।
16 अगस्त, 2022
- फीफा ने आधिकारिक तौर पर एआईएफएफ को निलंबित कर दिया। इसका मतलब है कि फीफा अंडर -17 महिला विश्व कप 2022, जो इस साल 11 से 30 अक्तूबर को होने वाला था, अब आयोजित नहीं हो पाएगा। मेजबानी लगभग छीनी जा चुकी है। भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा।
- FIFA के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई। मंगलवार को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की।
- इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुधवार की तारीख तय की जा चुकी है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर कल प्रमुखता से सुनवाई की जाएगी।
FIFA के नियम क्या कहते हैं?
सुप्रीम कोर्ट में मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी
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फीफा के नियमों के मुताबिक, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई प्रशासकों की समिति के हस्तक्षेप और उनके मुताबिक चुनाव कराए जाने पर फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को सस्पेंड कर दिया। फीफा ने पहले इसी तरह के मामलों में अन्य राष्ट्रीय संघों को भी निलंबित किया है।
कब निलंबन हटाएगा फीफा?
फीफा ने सोमवार के बयान में कहा- एआईएफएफ कार्यकारी समिति की शक्तियों को ग्रहण करने के लिए प्रशासकों की एक समिति (CoA) गठित करने के आदेश के निरस्त होने और एआईएफएफ प्रशासन एआईएफएफ के दैनिक मामलों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के बाद निलंबन हटा लिया जाएगा।
फीफा के निलंबन का मतलब यह है कि जब तक यह जारी रहेगा तब तक भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम और भारतीय महिला फुटबॉल टीम किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच में हिस्सा नहीं ले पाएगी। साथ ही कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय लीग में हिस्सा नहीं ले पाएगा।