फुटबॉल के महाकुंभ यानी फीफा विश्व कप का आज से आगाज होने जा रहा है। फुटबॉल के इस सबसे बड़े टूर्नामेंट में वर्षों से कई ऐसे खिलाड़ी देखने को मिले हैं, जिन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप के मंच पर अपनी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
आइए जानते हैं पिता-बेटे की ऐसी पांच जोड़ियों के बारे में, जिन्होंने फीफा विश्व कप में हिस्सा लेकर इतिहास रचा।
1. लुइस पेरेज और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
मेक्सिको के लिए फीफा विश्व कप खेलने वाली पिता-बेटे की जोड़ियों में लुइस पेरेज और मारियो पेरेज का नाम प्रमुख है। लुइस पेरेज 1930 में आयोजित पहले फीफा विश्व कप में मेक्सिको टीम का हिस्सा थे। वहीं उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, दोनों खिलाड़ी विश्व कप में कोई गोल करने में सफल नहीं हो सके।
2. मार्टी वैंटोलरा और जोस वैंटोलरा
मार्टी वैंटोलरा ने 1934 फीफा विश्व कप में स्पेन की ओर से खेला था। उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया। जोस ने टूर्नामेंट में चार मुकाबले खेले, लेकिन गोल करने में सफलता नहीं मिली। उनके पिता भी विश्व कप में गोल नहीं कर सके थे।
3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)
ब्राजील की ओर से विश्व कप खेलने वाले पिता-बेटे की इस जोड़ी ने भी खास पहचान बनाई। डोमिंगोस ने 1938 विश्व कप में चार मैच खेले थे, लेकिन कोई गोल नहीं कर पाए। वहीं उनके बेटे अदेमिर दा गुइया को 1974 फीफा विश्व कप में ब्राजील के लिए एक मैच खेलने का अवसर मिला था।
4. रोजर रियो और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
रोजर रियो ने 1934 विश्व कप में फ्रांस की ओर से एक मुकाबला खेला था। उनके बेटे पैट्रिस रियो ने 1978 विश्व कप में फ्रांस टीम का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, दोनों खिलाड़ी अपने-अपने विश्व कप अभियानों में गोल दर्ज नहीं कर सके।
5. निकोले लुपस्कु और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
रोमानिया के निकोले लुपस्कु ने 1970 फीफा विश्व कप में तीन मुकाबले खेले थे। उनके बेटे इओन लुपस्कु ने 1990 और 1994 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। इओन ने दोनों संस्करणों में कुल आठ मैच खेले, लेकिन वह भी विश्व कप में गोल करने में सफल नहीं हो सके।