एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टेनिस टीम के चयन को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के बीच पांच खिलाड़ियों के चयन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। साइ के एक सूत्र का कहना है कि पांचों खिलाड़ियों के नाम एआईटीए की ओर से भेजी गई अंतिम शॉर्टलिस्ट में शामिल ही नहीं थे। वहीं, एआईटीए ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसने इन खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सामने लिखित रूप से जोरदार पैरवी की थी।
किन खिलाड़ियों को नहीं मिली जगह?
एशियन गेम्स के लिए जिन पांच खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह नहीं मिली, उनमें...
- मानस धामने - पुरुष एकल
- वैष्णवी अडकर - महिला एकल
- सहजा यमलापल्ली - महिला एकल
- वैदेही चौधरी - महिला युगल
- प्रार्थना थोम्बारे - महिला युगल
साइ सूत्र के मुताबिक, ये खिलाड़ी चयन के लिए तय महाद्वीपीय रैंकिंग मानदंड को पूरा नहीं करते थे। यही वजह रही कि सात सदस्यीय भारतीय टेनिस टीम में उन्हें जगह नहीं दी गई।
साइ का दावा- शॉर्टलिस्ट में थे ही नहीं नाम
साइ के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा कि इन पांच खिलाड़ियों के नाम खेल मंत्रालय को भेजी गई अंतिम सूची में नहीं थे। सूत्र के मुताबिक, एआईटीए की ओर से आईओए को भेजी गई शॉर्टलिस्ट में भी इनके नाम शामिल नहीं किए गए थे। साइ का यह भी कहना है कि खिलाड़ियों का हालिया प्रदर्शन पदक जीतने की पर्याप्त संभावना नहीं दिखाता था। इसलिए उन्हें एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर शामिल करना तय मानदंडों के अनुरूप नहीं होता।
एआईटीए ने किया पलटवार
एआईटीए ने साइ के दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। एआईटीए के महासचिव सुंदर अय्यर ने कहा कि संघ ने आईओए के सीईओ रघुराम अय्यर के सामने इन खिलाड़ियों को अंतिम टीम में शामिल करने की स्पष्ट मांग रखी थी। एआईटीए के अनुसार, उसने 3 जुलाई 2026 को आईओए को लिखित प्रतिनिधित्व भी दिया था। एआईटीए ने कहा कि यह मामला सिर्फ कुछ खिलाड़ियों के चयन का नहीं था, बल्कि एशियन गेम्स में भारत की सबसे मजबूत संभावित टेनिस टीम उतारने का था।
चयन मानदंड बना विवाद की जड़
खिलाड़ियों के चयन को लेकर विवाद का मुख्य कारण खेल मंत्रालय की ओर से तय किया गया रैंकिंग मानदंड है। मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में यह नियम तय किया था।
- पुरुष और महिला एकल में खिलाड़ी को एशिया की शीर्ष 6 रैंकिंग में होना जरूरी था।
- युगल स्पर्धाओं के लिए खिलाड़ी की एशियाई रैंकिंग शीर्ष 8 में होनी चाहिए।
- रैंकिंग का आकलन 12 महीने की अवधि के आधार पर किया गया।
- साइ का कहना है कि पांचों खिलाड़ी इन मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे।
रैंकिंग के बावजूद मजबूत दावेदारी
इन खिलाड़ियों को बाहर किए जाने के फैसले की आलोचना इसलिए भी हो रही है क्योंकि इनमें से कुछ भारत के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। सहजा यमलापल्ली वर्तमान में भारत की नंबर-1 महिला एकल खिलाड़ी हैं और उनकी विश्व रैंकिंग 344 है। वैष्णवी अडकर विश्व रैंकिंग में 388वें स्थान पर हैं और भारत की नंबर-2 महिला एकल खिलाड़ी हैं। 18 वर्षीय मानस धामने चैलेंजर स्तर के टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंच चुके हैं। वहीं, वैदेही चौधरी दो बार की राष्ट्रीय चैंपियन हैं। प्रार्थना थोम्बारे 2014 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
रोहन बोपन्ना ने भी उठाए सवाल
दो बार के एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट रोहन बोपन्ना ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए खिलाड़ियों के समर्थन में आवाज उठाई है। बोपन्ना ने कहा कि जिन लोगों ने इन खिलाड़ियों जैसी परिस्थितियों का सामना नहीं किया, उन्होंने कागज पर बैठकर यह तय कर दिया कि उन्हें खेलने का मौका मिलना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि किसी देश में खेल संस्कृति और खेल अर्थव्यवस्था का निर्माण इस तरह नहीं किया जा सकता कि बोर्डरूम में बैठकर यह तय कर दिया जाए कि कौन खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
साइ ने कहा- एशियन गेम्स 'एक्सपोजर ट्रिप' नहीं
बोपन्ना की आलोचना का जवाब देते हुए साइ सूत्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के लिए एक्सपोजर टूर आईटीएफ और चैलेंजर सर्किट में किए जाने चाहिए, एशियन गेम्स में नहीं। साइ का तर्क है कि एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के चयन में तय मानदंडों और पदक की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मंत्रालय ने मानदंड में बदलाव से किया इनकार
खिलाड़ियों के समर्थन में उठ रही आवाजों के बावजूद खेल मंत्रालय ने चयन मानदंड में किसी तरह की ढील देने से इनकार किया है। साइ सूत्र के मुताबिक, यदि एशिया में 25वें से 40वें स्थान के खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में विशेष मंजूरी दी जाती है, तो इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। साथ ही दूसरे राष्ट्रीय खेल महासंघ भी इसी तरह की मांग करते हुए कानूनी चुनौती दे सकते हैं।
एशियन गेम्स के लिए भारतीय टेनिस टीम
फिलहाल एशियन गेम्स के लिए भारतीय टेनिस टीम में सिर्फ सुमित नागल एकल खिलाड़ी के रूप में शामिल हैं।
दोहरे मुकाबलों के लिए टीम में
- रामकुमार रामनाथन
- साकेत मयनेनी
- युकी भांबरी
- ऋतुजा भोसले
- अंकिता रैना
प्रार्थना थोम्बारे और वैदेही चौधरी की जोड़ी को महिला युगल में संभावित रूप से साथ उतारा जा सकता था, लेकिन दोनों ने अब तक एक साथ कोई मैच नहीं खेला है। साइ सूत्र ने इसे भी चयन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहलू बताया है।
टेनिस के लिए 10.05 करोड़ रुपये का बजट
2026-27 के वार्षिक प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण कैलेंडर (एसीटीसी) में टेनिस के लिए 10.05 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसमें से 2 करोड़ रुपये से अधिक राशि विदेशों में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर खर्च की जाएगी।