इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के अगले दिन ही इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने न सिर्फ चुनाव कराए बल्कि दागी ललित भनोट को सेक्रेटरी जनरल के पद पर निर्वाचित घोषित कर दिया। आईओसी की कार्रवाई के विपरीत आईओए ने अपनी चुनावी प्रक्रिया पूरी करते हुए अध्यक्ष पद पर अभय सिंह चौटाला को निर्वाचित घोषित किया।
हालांकि आईओसी पहले ही साफ कर चुकी है कि आईओए के चुनाव को मान्यता नहीं दी जाएगी लेकिन आईओए के हाउस ने सर्वसम्मति से चुनाव कराने को मंजूरी दी। इसके बाद सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश अनिल देव सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय पैनल ने स्पोर्ट्स कोड के अनुसार चुनाव कराए जिसमें 183 में से 167 वोट डाले गए। आईओसी सदस्य रंधीर सिंह समेत कुछ खेल प्रमुखों ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।
आईओसी के पत्र में साफ किया गया है कि चुनाव में आईओए पर प्रतिबंध ओलंपिक चार्टर का पालन नहीं करने और सुशासन और नैतिकता नहीं अपनाने के चलते प्रतिबंध लगाया है। आईओसी का नैतिकता नहीं अपनाने पर साफ इशारा ललित भनोट की उम्मीदवारी पर था। आईओसी का एथिक्स कमीशन पहले ही साफ कर चुका था कि आईओए के चुनाव में सुरेश कलमाडी, ललित भनोट और वीके वर्मा को खड़े होने का हक नहीं है।
बावजूद इसके चौटाला ग्रुप ने न सिर्फ भनोट को उम्मीदवार बनाया बल्कि आज वह आईओए के सेक्रेटरी जनरल भी चुन लिए गए। आईओए के पूर्व अध्यक्ष विजय मल्होत्रा से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भनोट इस मामले पर अपनी स्थिति खुद स्पष्ट करेंगे। लेकिन देर रात तक भनोट चुने जाने के बावजूद मीडिया से रू-ब-रू नहीं हुए।
वहीं, चुने गए एक अधिकारी के मुताबिक आईओए आईओसी से किसी तरह के टकराव के मूड में नहीं है वह अपने कुछ सदस्यों को बातचीत के लिए आईओसी के पास भेजेगा और उसे समझाने की कोशिश करेगा कि उन्होंने स्पोर्ट्स कोड की आड़ में ओलंपिक चार्टर का पूरी तरह से पालन किया है। यही कारण है कि आईओए के अधिकारी आईओसी के प्रतिबंध को कोर्ट आफ आरबिट्रेशन फार स्पोर्ट्स (कैस) नहीं ले जाना चाहते हैं। लेकिन कुछ सदस्यों का कहना है कि इस प्रतिबंध को हर हाल में कैस में चुनौती दी जानी चाहिए जिससे प्रतिबंध से बचा जा सके। फिलहाल आईओए के आला अधिकारी आईओसी से बातचीत के पक्ष में हैं।