भारतीय कुश्ती में डोपिंग और व्हेयरअबाउट्स उल्लंघन के बढ़ते मामलों के बाद डब्ल्यूएफआई ने पहलवानों को एंटी-डोपिंग नियमों के पालन को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। डोपिंग मामलों के कारण मुकुल दहिया और दीपांशु एशियन गेम्स टीम से बाहर हुए, जबकि अंडर-23 स्तर पर भी कई पहलवान कार्रवाई की चपेट में आए हैं।
भारतीय कुश्ती में डोपिंग और व्हेयरअबाउट्स नियमों के उल्लंघन के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) ने पहलवानों के लिए सख्त एंटी-डोपिंग एडवाइजरी जारी की है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि एंटी-डोपिंग नियमों के पालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी खिलाड़ियों की है और नियमों की जानकारी न होने या किसी अन्य व्यक्ति की सलाह पर प्रतिबंधित पदार्थ लेने का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
हालिया मामलों का सबसे बड़ा असर आगामी एशियन गेम्स में भारत की कुश्ती टीम पर पड़ा है। डोपिंग मामलों के कारण 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल के मुकुल दहिया और 130 किलोग्राम ग्रीको-रोमन के दीपांशु को भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। इसके चलते इन दोनों भार वर्गों में भारत की ओर से कोई पहलवान हिस्सा नहीं ले सकेगा।
डोपिंग के कारण गंवाए दो एशियन गेम्स स्लॉट
डब्ल्यूएफआई के एक सूत्र के मुताबिक, फेडरेशन ने दीपांशु की जगह रोनक दहिया को टीम में शामिल करने का प्रयास किया था, लेकिन बताया गया कि डोपिंग उल्लंघन की स्थिति में रिप्लेसमेंट की अनुमति नहीं है। रिप्लेसमेंट केवल चोट की स्थिति में किया जा सकता है।
सूत्र ने कहा कि पहलवानों में एंटी-डोपिंग नियमों को लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ी समस्या है। खासकर व्हेयरअबाउट्स नियमों के तहत होने वाले टेस्ट में अनुपस्थित रहने के मामले सामने आ रहे हैं। इसी वजह से डब्ल्यूएफआई ने यह एडवाइजरी जारी की है।
मुकुल दहिया ने दोस्त की सलाह पर लिया था इंजेक्शन
मुकुल दहिया ने 2026 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। उनको प्रतिबंधित पदार्थ मेफेंटरमाइन के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने अस्थायी रूप से निलंबित किया है। उनका सैंपल 31 मई को लखनऊ स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) सेंटर में एशियन गेम्स चयन ट्रायल के दौरान लिया गया था। मुकुल ने 86 किलोग्राम वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था।
डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मुकुल ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि उन्होंने एक साथी पहलवान की सलाह पर इंजेक्शन लिया था। फेडरेशन का कहना है कि खिलाड़ियों को यह समझना होगा कि उनके शरीर में जाने वाली किसी भी दवा या पदार्थ की जिम्मेदारी उनकी खुद की है।
दीपांशु पर आठ साल का बैन
130 किलोग्राम ग्रीको-रोमन पहलवान दीपांशु को स्टैनोजोलोल के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद आठ साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा है। डब्ल्यूएफआई सूत्र के अनुसार, इसे उनका दूसरा एंटी-डोपिंग उल्लंघन माना गया। दीपांशु इससे पहले भी इसी पदार्थ के लिए तीन साल का प्रतिबंध झेल चुके हैं। पिछले साल उन्होंने प्रतियोगिता में वापसी की थी और मई में हुए एशियन गेम्स चयन ट्रायल में जीत दर्ज कर भारतीय टीम में जगह बनाई थी। इन दोनों मामलों के कारण एशियन गेम्स में भारत की कुश्ती टीम की संख्या 18 से घटकर 16 रह गई है।
अंडर-23 स्तर पर भी डोपिंग की चिंता
डोपिंग का असर अब जूनियर स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। जुलाई में रोहतक में आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप के पदक विजेता निखिल (55 किग्रा ग्रीको-रोमन) और रोहित कुमार (65 किग्रा फ्रीस्टाइल) के प्रतियोगिता के दौरान लिए गए सैंपल प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए। दोनों को नाडा ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके चलते वे अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग छिक्कारा भी फंसे
2024 के अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग छिक्कारा (57 किग्रा) भी व्हेयरअबाउट्स नियमों के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। उन्हें तीन बार व्हेयरअबाउट्स विफलता के नोटिस के बाद दो साल के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है।
डब्ल्यूएफआई की पहलवानों को सख्त हिदायत
मौजूदा घटनाक्रम के बाद डब्ल्यूएफआई ने अपनी एडवाइजरी में पहलवानों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। फेडरेशन ने कहा है कि नाडा के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (आरटीपी) या किसी अन्य टेस्टिंग पूल में शामिल खिलाड़ियों को अपनी व्हेयरअबाउट्स जानकारी हमेशा सही और अपडेट रखनी होगी। पहलवानों को नियमित रूप से अपने नाडा/एडीएएमएस अकाउंट चेक करने और अपने निवास, ट्रेनिंग सेंटर, यात्रा कार्यक्रम तथा प्रतियोगिता से जुड़ी जानकारी में किसी भी बदलाव को तुरंत अपडेट करने की सलाह दी गई है। आरटीपी में शामिल खिलाड़ियों को लागू 60 मिनट की टेस्टिंग आवश्यकता का भी पालन करना होगा।
दवाओं और सप्लीमेंट्स को लेकर भी सावधानी
डब्ल्यूएफआई ने पहलवानों से दवाइयों, सप्लीमेंट्स और न्यूट्रिशनल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा है। किसी भी पदार्थ का सेवन करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि वह एंटी-डोपिंग नियमों के तहत प्रतिबंधित तो नहीं है। फेडरेशन ने यह भी कहा है कि खिलाड़ियों को अपने डॉक्टरों को यह जानकारी देनी चाहिए कि वे एंटी-डोपिंग नियमों के अधीन हैं। इसके अलावा, पहलवानों को साथी खिलाड़ियों, कोच, ट्रेनर या जिम स्टाफ की सलाह पर अपनी मर्जी से कोई दवा या सप्लीमेंट लेने से बचने की हिदायत दी गई है।
'स्वच्छ खेल की संस्कृति बनाना लक्ष्य'
डब्ल्यूएफआई ने कहा है कि वह पहलवानों के बीच एंटी-डोपिंग को लेकर शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। फेडरेशन का उद्देश्य केवल डोपिंग उल्लंघनों को रोकना नहीं, बल्कि कुश्ती में स्वच्छ खेल, सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित करना है। डब्ल्यूएफआई का स्पष्ट संदेश है कि एंटी-डोपिंग नियमों से अनजान होना, कोच या सपोर्ट स्टाफ पर निर्भर रहना अथवा प्रतिबंधित पदार्थ का अनजाने में सेवन करना खिलाड़ी को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।