डोपिंग में फंसे पहलवान नरसिंह यादव को लेकर राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी नाडा ने अपना फैसला सोमवार तक सुरक्षित रखा है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि नाडा शनिवार को इस मामले में अपना फैसला सुना देगी।
नाडा इस मामले में दो दिन की सुनवाई पूरी कर चुकी है जिसमें नरसिंह ने अपने साथ साजिश होने का आरोप लगाया है। अगर नाडा ने नरसिंह की दलीलें नहीं मानीं और उन्हें दोषी माना तो उन पर 2 से 4 साल तक का बैन लग सकता है।
नरसिंह ने पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन उनके डोप टेस्ट में फेल हो जाने के बाद रियो में उनकी भागीदारी संकट में पड़ गई है। हालांकि इस बीच भारतीय कुश्ती संघ ने नरसिंह की जगह 74 किलो भारवर्ग में स्टैंडबाई पहलवान प्रवीण राणा का नाम ओलंपिक के लिए भेज दिया है।
ब्लड के साथ यूरिन सैंपल भी लिया
नरसिंह यादव
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डोप में फंसे पहलवान नरसिंह यादव सिर्फ नाडा ही नहीं बल्कि वाडा के भी निशाने पर थे। यह वाडा ही था जिसने नाडा से नरसिंह यादव का ब्लड सैंपल लेने को कहा था। नाडा ने जब 25 जून और पांच जुलाई को वाडा के कहने पर उनका ब्लड सैंपल लिया तो उसने खुद से ही उनका यूरिन सैंपल भी ले लिया।
हैरानी की बात यह है कि 25 जून और पांच जुलाई के ब्लड सैंपल में नरसिंह पाक-साफ निकले हैं, लेकिन इनके साथ ही लिए गए उनके यूरिन सैंपल में एनॉबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया है।
दरअसल दो जून को नाडा ने नरसिंह का यूरिन सैंपल लिया था, जिसमें वह ठीक निकले। इसके बाद वाडा ने निर्देश दिए कि नरसिंह का ब्लड सैंपल लेकर उनके कुछ टेस्ट लिए जाएं।
बदकिस्मत साबित हुए नरसिंह
नरसिंह यादव
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नाडा के सूत्रों का कहना है कि यह ब्लड सैंपलिंग ऐसी थी कि एक सैंपल में टेस्टिंग नहीं हो सकती थी। जिसके चलते उनकी ब्लड सैंपलिंग 25 जून और पांच जुलाई को की गई। सूत्रों का कहना है कि ब्लड सैंपल के साथ नरसिंह का यूरिन सैंपल लेने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन नाडा टीम ने सोचा जब उनका ब्लड सैंपल लिया जा रहा है तो क्यों नहीं साथ में यूरिन सैंपल ले लिया जाए।
यहीं नरसिंह बदकिस्मत साबित हुए। नाडा सूत्रों का कहना है कि अगर इन दोनों ही दिनों में वाडा के कहने के अनुसार नरसिंह का केवल ब्लड सैंपल लिया गया होता तो शायद वह ओलंपिक में खेलने का हक रख रहे होते।