भारतीय टीम का यह बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में पांचवां स्वर्ण जीता। इससे पहले वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू, जेरेमी लालनिरुंगा और अचिंता शेउली, फिर लॉन बॉल में महिला टीम ने स्वर्ण जीता। इसके अलावा भारत चार रजत और तीन कांस्य जीत चुका है। भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है।
टेबल टेनिस टीम ने सभी राष्ट्रमंडल खेलों को मिलाकर टीटी में भारत के लिए सातवां स्वर्ण जीता। भारतीय पुरुष टीम में दिग्गज अचंता शरत कमल, हरमीत देसाई और साथियान ज्ञानशेखरन शामिल थे। आइए फाइनल में जीत दिलाने वाले तीन खिलाड़ियों के बारे में जानते हैं।
तमिलनाडु के इस स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी ने अपने कॉमनवेल्थ गेम्स करियर में इस पदक को मिलाकर भारत के लिए कुल 10 पदक जीते हैं। उनके पदक तालिका में पांच स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक शामिल हैं। उनकी सबसे सफल आउटिंग 2018 के दौरान ऑस्ट्रेलिया (गोल्ड कोस्ट) में हुई थी, जिसमें उन्होंने चार पदक जीते थे। शरत कमल 2003 में टेबल टेनिस की राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर पहली बार सुर्खियों में आए थे।
इसके बाद साल 2004 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी साल उन्होंने एथेंस ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। 2006 राष्ट्रमडंल खेलों में टेबल टेनिस चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर वह देश के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बन गए। 2006 में ही व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने के अलावा अंचता ने सिंगापुर के खिलाफ भारतीय टेबल टेनिस टीम को जिताने में महत्त्वपूर्ण रोल अदा किया। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में सेवारत अचंत शरत राष्ट्रमडंल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी हैं।
गुजरात के स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी हरमीत देसाई के भाई भी इस खेल में रुचि रखते थे। हरमीत के बड़े भाई ने ही शुरुआत में उन्हें ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद उनका खेल निखरता गया और उन्हें बाकी सुविधाएं भी मिलने लगीं। 2019 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। हरमीत पहले भी राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल में पदक जीते हैं।
साथियान बचपन में इंजीनियर बनन का सपना देखते थे और इसी फील्ड में मास्टर्स करके अपना करियर बनाना चाहते थे। वो शैकिया तौर पर टेबल टेनिस खेलते थे। इस बीच उनकी मुलाकात पहले कोच सुब्रमणयम रमन से हुई। इस पूर्व टेबल टेनिस खिलाड़ी ने उन्हें टेनिस में करियर बनाने के लिए कहा और साथियान ने टेबल टेनिस में ही अपना करियर बनाने का फैसला किया।
राज्य सरकार ने उन्हें स्कॉलरशिप देकर मदद की और 2011 विश्व जूनियर चैंपियनशिप में उन्होंने भारतीय टीम को कांस्य पदक जिताने में अहम रोल अदा किया। 2016 में उन्होंने पहली बार प्रो टूर का खिताब जीता।
2017 में शरत कमल के साथ मिलकर आईटीटीएफ मेजर टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता। इस जोड़ी ने कुछ महीने बाद आईटीटीएफ टूर्नामेंट में रजत पदक भी जीता। 2018 में उन्होंने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया और टीम के साथ तीन पदक अपने नाम किए।