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Commonwealth Games: जानें क्या है लॉन बॉल जिसमें भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, 92 साल में पहला पदक जीता

Tue, 02 Aug 2022 08:17 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लॉन बॉल स्पोर्ट के बॉल का वजन करीब डेढ़ किलो होता है। यह एक तरफ ज्यादा भारी होती है, ताकि खिलाड़ी इसको कर्ल या घुमा सकें। 1930 से ही यह खेल राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा रहा है, 1966 को छोड़कर।
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भारतीय लॉन बॉल टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला लॉन बॉल टीम ने इतिहास रच दिया है। टीम ने 92 साल के राष्ट्रमंडल खेलों में इस स्पोर्ट के इतिहास में पहला पदक जीता है। भारतीय महिला टीम ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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भारतीय दल की सबसे उम्रदराज महिलाओं की टीम लॉन बॉल में थी, लेकिन चारों महिलाओं ने उम्र को पीछे छोड़ते हुए लॉन बॉल में देश का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक पक्का कर दिया। भारतीय महिलाओं ने सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड को हराया। इसके बाद फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 17-10 से हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

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India women's fours team enters Lawn Bowls semifinals at Commonwealth Games  - Sentinelassamभारतीय टीम

क्या है लॉन बॉल?
लॉन बॉल स्पोर्ट के बॉल का वजन करीब डेढ़ किलो होता है। यह एक तरफ ज्यादा भारी होती है, ताकि खिलाड़ी इसको कर्ल या घुमा सकें। 1930 से ही यह खेल राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा रहा है, 1966 को छोड़कर। भारत में ज्यादातर लोगों को इस खेल की जानकारी नहीं है। आइए जानते हैं लॉन बॉल क्या है...

यह एक आउटडोर खेल है। लॉन बॉल का एक रूप प्राचीन मिस्र में खेला जाता था और अब यह यूरोपीय देशों में काफी प्रचलित है। कटोरे, जिसे लॉन बॉल भी कहा जाता है। एक गेंद (जिसे कटोरे के रूप में जाना जाता है) को एक छोटी स्थिर गेंद की ओर घुमाया जाता है, जिसे जैक कहा जाता है। जैक का दूसरा नाम 'लक्ष्य' होता है। जैक एक छोटी गेंद होती है, जिसका डायामीटर 63-67 मिलीमीटर होता है, जबकि बड़ी बॉल का डायामीटर 112-134 मिलीमीटर का होता है। इस गेंद को इस तरह से बनाया जाता है कि यह कभी एक सीध में नहीं लुढ़कती। 

पीले रंग की गेंद 'जैक' है, वहीं लाल और नीले रंग की गेंदों से एक तय दूरी से उसपर निशाना साधा जाता है

खिलाड़ी को अलग-अलग रंगों की बॉल को 23 मीटर की दूरी से लक्ष्य (जैक) के पास पहुंचाना होता है। जिसकी बॉल लक्ष्य के सबसे नजदीक जाती है उसे अंक मिलता है। खिलाड़ी मैच में बारी-बारी से बॉल लुढ़काते हैं। ये गेम चार तरह से खेला जाता है, जिसमें एकल, युगल, तीन की टीम और चार की टीम शामिल होती हैं। हर टीम में खिलाड़ियों को उनकी संख्या के आधार पर बांटा जाता है।

कुछ वीडियो देखकर समझें

पुरुष और महिला दोनों का खेल अलग होता है और दोनों के लिए अलग पदक होते हैं। अंकों का इस खेल में ज्यादा योगदान नहीं होता है। सामान्य बात है, जिस देश का खिलाड़ी जैक के जितनी करीब पहुंच जाता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। एक मैच में अगर कोई खिलाड़ी पहले 21 नंबर हासिल कर लेता है तो फिर वह विजेता बन जाता है। इसके अलावा युगल और अन्य गेम में 18 नंबर हासिल करने होते हैं।


लॉन बॉल का मैदान (इसे लॉन कहते हैं)
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राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन बॉल में पदकों का रिकॉर्ड

साल 1930 से राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन बॉल खेला जा रहा है और भारत ने 2010 से इन खेलों में हिस्सा लिया। पिछले 12 साल से इस गेम में भारत को कोई भी पदक नहीं मिला। हालांकि, इस बार टीम ने स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया। राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन बॉल में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला देश इंग्लैंड है।

इंग्लैंड इन खेलों में सबसे सफल देश है। यह देश 50 पदक जीत चुका है, जिसमें 20 स्वर्ण, 10 रजत और 20 कांस्य पदक जीते हैं। इंग्लैंड के बाद स्कॉटलैंड दूसरे नंबर पर है। उसने राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन बॉल में 38 पदक जीते, जिसमें 18 स्वर्ण, 10 रजत और 10 कांस्य पदक शामिल है। पदकों के मामले में तीसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका है। दक्षिण अफ्रीका ने अभी तक 43 पदक जीते हैं। इनमें 17 स्वर्ण, 12 रजत और 14 कांस्य पदक शामिल है।
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