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Explainer: 10 खेल, नई चुनौतियां और भारत की उम्मीदें, क्यों सबसे अलग होंगे ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स?

Tue, 21 Jul 2026 05:27 AM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 इस बार नए प्रारूप और कम खेलों के साथ आयोजित होंगे। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी और किन खिलाड़ियों से उम्मीदें रहेंगी, जानिए सबकुछ...

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : ANI
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विस्तार
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने जा रहा है। यह खेलों का 23वां संस्करण होगा, लेकिन कई मायनों में यह अब तक का सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। इस बार न केवल खेलों की संख्या आधी कर दी गई है, बल्कि भारत के कई पारंपरिक पदक दिलाने वाले खेल भी कार्यक्रम से बाहर हैं। ऐसे में भारतीय दल के सामने कम खेलों में ज्यादा प्रभाव छोड़ने की चुनौती होगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 क्यों खास हैं...
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
कॉमनवेल्थ गेम्स क्या हैं और कैसे हुई शुरुआत?
कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में हुई थी। उस समय इन खेलों को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था। इसमें उन देशों ने हिस्सा लिया जो ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे या कभी उसके उपनिवेश रहे थे। इन खेलों का आयोजन सामान्यतः हर चार वर्ष में होता है। हालांकि द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में इनका आयोजन नहीं हो सका। भारत ने पहली बार 1934 में इन खेलों में भाग लिया था। आजादी के बाद भारत लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और अब तक चौथा सबसे सफल देश बन चुका है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
2026 में फिर ग्लासगो क्यों?
स्कॉटलैंड का शहर ग्लासगो दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2014 में यहां सफल आयोजन हुआ था। हालांकि इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी छोटा होगा। जहां 2014 में 14 वेन्यू पर 17 खेल आयोजित हुए थे, वहीं 2026 में सिर्फ चार प्रमुख खेल परिसरों में प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। सभी वेन्यू लगभग आठ मील के दायरे में स्थित हैं। आयोजकों का उद्देश्य कम खर्च, बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल आयोजन करना है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
किन देशों ने सबसे ज्यादा बार की मेजबानी?

कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम है।

देश मेजबानी
ऑस्ट्रेलिया 5 बार
कनाडा 4 बार
स्कॉटलैंड 4 बार (2026 सहित)
इंग्लैंड 3 बार
न्यूजीलैंड 3 बार
भारत 1 बार (2010)
मलेशिया 1 बार
जमैका 1 बार
वेल्स 1 बार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
इस बार सिर्फ 10 खेल... आखिर क्यों?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (बर्मिंघम) में 20 खेल शामिल थे, लेकिन इस बार इनकी संख्या घटाकर 10 कर दी गई है।

शामिल खेल
  • एथलेटिक्स एवं पैरा एथलेटिक्स
  • स्विमिंग एवं पैरा स्विमिंग
  • आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स
  • ट्रैक साइकिलिंग एवं पैरा ट्रैक साइकिलिंग
  • नेटबॉल
  • वेटलिफ्टिंग एवं पैरा वेटलिफ्टिंग
  • बॉक्सिंग
  • जूडो
  • बॉल्स एवं पैरा बॉल्स
  • 3x3 बास्केटबॉल एवं व्हीलचेयर 3x3 बास्केटबॉल

क्रिकेट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobestock
किन खेलों को बाहर कर दिया गया?

इस बार कई लोकप्रिय खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।
  • क्रिकेट
  • हॉकी
  • बैडमिंटन
  • कुश्ती
  • निशानेबाजी
  • टेबल टेनिस
  • स्क्वैश
  • डाइविंग
  • रग्बी सेवेंस
  • बीच वॉलीबॉल
  • माउंटेन बाइकिंग
  • रिदमिक जिम्नास्टिक्स
सबसे बड़ा झटका भारत के लिए निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी का बाहर होना माना जा रहा है, क्योंकि इन खेलों में भारत लगातार बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
भारत का कॉमनवेल्थ इतिहास कितना मजबूत?
भारत कॉमनवेल्थ गेम्स के सबसे सफल देशों में शामिल है। अब तक भारत ने कुल 564 पदक जीते हैं। इनमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य शामिल हैं। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर है। पहले तीन स्थानों पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा शामिल हैं।

निशानेबाजी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : adobestock
भारत का सबसे सफल खेल कौन-सा रहा?
भारत ने सबसे ज्यादा सफलता निशानेबाजी में हासिल की है। अब तक शूटिंग में भारत ने 63 स्वर्ण, 44 रजत और 28 कांस्य यानी कुल 135 पदक जीते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इस बार शूटिंग ही कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है।

नीरज चोपड़ा - फोटो : IANS
भारत का दल कितना बड़ा है?
खेल मंत्रालय ने 191 सदस्यीय भारतीय दल को मंजूरी दी है। इसमें 126 खिलाड़ी, 51 टीम अधिकारी, अन्य तकनीकी एवं प्रशासनिक सदस्य शामिल हैं। खिलाड़ियों में 78 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारत इस बार नौ सक्षम खेलों और पांच पैरा खेलों में चुनौती पेश करेगा।

मीराबाई चानू-नीरज चोपड़ा-लवलीना बोरगोहेन - फोटो : ANI
किन खिलाड़ियों पर रहेंगी सबसे ज्यादा नजरें?
  • मीराबाई चानू
टोक्यो ओलंपिक रजत पदक विजेता और 2022 कॉमनवेल्थ चैंपियन मीराबाई से एक बार फिर स्वर्ण पदक की उम्मीद है।
  • लवलीना बोरगोहेन
टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज पहली बार कॉमनवेल्थ में पदक जीतने उतरेंगी।
  • नीरज चोपड़ा
भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारे नीरज चोपड़ा की अगुआई में भारत की सबसे बड़ी एथलेटिक्स टीम मैदान में उतरेगी।

मीराबाई चानू-लवलीना बोरगोहेन - फोटो : ANI
उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक कौन होंगी?
भारतीय ओलंपिक संघ ने मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को संयुक्त रूप से भारतीय दल का ध्वजवाहक बनाया है। दो महिला खिलाड़ियों को यह जिम्मेदारी मिलना भारतीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 - फोटो : Commonwealth games
उद्घाटन समारोह क्यों रहेगा ऐतिहासिक?
23 जुलाई को होने वाले उद्घाटन समारोह में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला आधिकारिक तौर पर खेलों का उद्घाटन करेंगे। समारोह का सबसे खास क्षण होगा जब किंग चार्ल्स 'किंग्स बैटन' में रखा अपना संदेश पढ़ेंगे, जो उन्होंने मार्च 2025 में बैटन में रखा था।

नीरज चोपड़ा - फोटो : PTI
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
भारत की सबसे बड़ी चुनौती कम खेलों में अधिक पदक जीतना होगी। निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और क्रिकेट जैसे खेल बाहर होने के कारण भारत के पारंपरिक पदकों में स्वाभाविक कमी आ सकती है। अब भारत की उम्मीदें मुख्य रूप से एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स पर टिकी रहेंगी।

मनसुख मांडविया, केंद्रीय खेल मंत्री - फोटो : ANI
खेल मंत्रालय ने क्या नए नियम लागू किए?
  • इस बार सरकार ने कुछ सख्त फैसले भी लिए हैं।
  • खिलाड़ियों और अधिकारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया।
  • निजी कोचों को दल में शामिल करने की अनुमति नहीं दी गई।
  • प्रतियोगिता से लौटने के 30 दिनों के भीतर प्रदर्शन रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • भारतीय ओलंपिक संघ के निर्वाचित पदाधिकारियों का खर्च सरकार नहीं उठाएगी यदि वे टीम अधिकारी के रूप में शामिल हैं।
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मीराबाई चानू - फोटो : Twitter
क्या इस बार भारत का पदक प्रदर्शन प्रभावित होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भारत के कुल पदकों की संख्या 2022 की तुलना में कम रह सकती है, क्योंकि जिन खेलों में भारत पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पदक जीतता है, वे इस बार कार्यक्रम में शामिल ही नहीं हैं। हालांकि, एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और पैरा स्पोर्ट्स में मजबूत प्रदर्शन भारत को पदक तालिका में शीर्ष देशों के बीच बनाए रख सकता है।
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