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CWG 2022: पांच साल के सुधीर को पोलियो ने बनाया था दिव्यांग, फिट रहने के लिए शुरू की पावरलिफ्टिंग, अब जीता सोना

Fri, 05 Aug 2022 10:34 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बर्मिंघम

सार

सुधीर लगातार सात बार के नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऐसे में देशवासियों को उनसे राष्ट्रमंडल में भी सोना जीतने की ही उम्मीद थी। सुधीर ने भारतीयों को निराश नहीं किया और स्वर्ण जीतकर उम्मीदों पर खरे उतरे।
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सुधीर स्वर्ण पदक के साथ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पैरा-पावरलिफ्टर सुधीर ने भारत के लिए बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में छठा स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पैरा-पावरलिफ्टिंग (दिव्यांग एथलीट्स की वेटलिफ्टिंग) में 212 किलो वजन उठाने के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साथ ही सुधीर ने गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। 
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लगातार सात बार नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट



सुधीर लगातार सात बार के नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऐसे में देशवासियों को उनसे राष्ट्रमंडल में भी सोना जीतने की ही उम्मीद थी। सुधीर ने भारतीयों को निराश नहीं किया और स्वर्ण जीतकर उम्मीदों पर खरे उतरे। सुधीर दो बार के स्ट्रांगमैन ऑफ इंडिया का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं।

सोनीपत के रहने वाले हैं सुधीर



हरियाणा के सोनीपत के गांव लाठ में किसान परिवार में जन्मे सुधीर बचपन से ही प्रतिभावान रहे हैं। पांच वर्ष की आयु में पैर में परेशानी के चलते वह दिव्यांग हो गए। सुधीर पोलियो का शिकार हुए थे। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। साल 2013 में शरीर को फिट रखने के लिए उन्होंने पावरलिफ्टिंग शुरू की थी। इसमें लगातार अभ्यास करते रहने की वजह से उन्होंने इस खेल को जीवन का हिस्सा बना लिया। 

वीरेंद्र धनखड़ से प्रेरित होकर पावरलिफ्टिंग शुरू की



पैरा खिलाड़ी वीरेंद्र धनखड़ से प्रेरित होकर सुधीर ने पैरा पावरलिफ्टिंग शुरू की थी। महज दो साल की मेहनत से ही वह नेशनल तक पहुंचे और राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। यहीं से सुधीर के मन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की उम्मीद जगी। सुधीर पिछले लगातार सात साल से नेशनल्स में पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण जीतते आ रहे हैं।

स्ट्रांग मैन ऑफ इंडिया का खिताब जीत चुके



साल 2021 और 2022 में सुधीर ने स्ट्रांग मैन ऑफ इंडिया का खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयारी शुरू कर दी। लोगों की उम्मीद पर खरा उतरने के लिए वह दिल्ली में रोजाना पांच घंटे जमकर पसीना बहाने लगे। वह दिल्ली में रहकर सुबह तीन घंटे और शाम को दो घंटे रोजाना जमकर मेहनत करते थे। इसके लिए सुधीर रोजाना 250 किलो की बेंच प्रेस लगाते थे।

कोई दूसरा पावरलिफ्टर सुधीर के आसपास नहीं

इस मेहनत ने सुधीर को राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया है। मेन्स हेवीवेट कैटेगरी के फाइनल में उनके आसपास भी कोई नहीं था। नाइजीरिया के 74.10 किलो  वजन वाले इकेचुकु क्रिस्टियन ओबिचुकु ने 192 किलो वजन उठाया और 133.6 अंकों के साथ रजत पदक जीता, जबकि स्कॉटलैंड के मिकी यूल ने 130.9 अंकों के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। 

सुधीर ने भारतीयों को गर्व करने का मौका दिया - फोटो : सोशल मीडिया
सुधीर कहते हैं कि उन्होंने हमेशा देशी खानपान को तरजीह दी है। वह आज भी रोजाना पांच किलो दूध के साथ ही चने और बादाम खाते हैं। इससे उनका शरीर पूरी तरह नेचुरल रहता है। वह अन्य खिलाड़ियों को भी स्टेरॉयड का प्रयोग नहीं करने की सलाह देते हैं। वह अभी से पेरिस पैरा ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हैं। इसके साथ ही सुधीर ने अगले साल होने वाले हांग्झू एशियाई पैरा खेलों के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है।

सुधीर की उपलब्धियां 
  • लगातार सात साल से राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता।
  • दो बार स्ट्रांग मैन ऑफ इंडिया का खिताब जीता। 
  • वर्ष 2019 में पैरा एशियन गेम्स में कांस्य पदक।
  • वर्ष 2021 में दक्षिण कोरिया में एशिया-ओसियाना ओपन पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
  • 2023 हांग्झू एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई किया। 
  • 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक।
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पावरलिफ्टिंग में कैसे मिलते हैं अंक?

पावरलिफ्टिंग में एथलीट्स को तीन अटैम्प्ट दिए जाते हैं। वजन उठाने पर शरीर के वजन और तकनीक के अनुसार अंक मिलते हैं। समान वजन उठाने पर शारीरिक रूप से कम वजन वाले खिलाड़ी को दूसरे की तुलना में अधिक अंक मिलते हैं।

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