‘मैं शीर्ष पर पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हूं, लेकिन क्या करूं चीनी दस हैं और मैं एक। सबको हरा पाना तो संभव नहीं है। हालांकि किसी टॉप सीड चीनी प्लेयर को मात देने का मजा ही अलग है और इसकी खुशी बयां नहीं कर सकती। भारतीय बैडमिंटन स्तर में अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।’ यह कहना है साइना नेहवाल का, जो मंगलवार को यहां संवाददाताओं से रू-ब-रू हुईं। उन्होंने कहा कि मुझे दिन भर कई ईमेल और फोन आते है, जिसमें युवा शटलर अभ्यास के लिए मुझसे सलाह मांगते है, लेकिन आज देश में बैडमिंटन की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
शटलर स्तरीय प्रैक्टिस हाल से लेकर कोच की तलाश में दर-दर भटकते हैं, वहीं दूसरी ओर चीन में ट्रेनिंग का हाईटेक तरीका उनके खिलाड़ियों को और से अलग बनाता है। साइना ने कहा कि जीत के जुनून के बिना कोई भी खिलाड़ी बड़ा नहीं बन सकता। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यहां तक पहुंचूंगी, लेकिन आज सबसे सामने खड़ी हूं। यह मेरे संकल्प और परिजन व कोच का आशीर्वाद है कि चीनी शटलरों का डटकर मुकाबला कर पाती हूं।
लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने का लम्हा याद करते हुए उन्होंने कहा कि ओलंपिक शुरू होने से कुछ दिन पहले बुखार हो गया था, जिस कारण डर सताने लगा था कि शायद पदक न जीत पाऊं। बावजूद इसके कांस्य जीतने में सफल रही। इस सफलता के बाद सबसे पहले पापा को फोन किया था। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के चुनाव पर चल रहे विवाद पर साइना ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
सहारा के लोगो के साथ उतरेगी साइना
लंदन ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल अपने सहारा के लोगो के साथ कोर्ट में उतरेंगी। मंगलवार को हुए समारोह में सहारा परिवार के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अशोक राय ने यह घोषणा करते हुए कहा कि देश के अन्य खिलाड़ियों की तरह अब सहारा ने साइना नेहवाल को अपने परिवार से जोड़ा जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में साइना और भी बड़ी सफलताएं हासिल करेंगी।