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कैबिनेट का फैसला: भारत बनेगा स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब, 1856 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

Wed, 28 Oct 2026 06:08 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026 से 2033-34 तक के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये की ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को मंजूरी दी है।
  • इस योजना का उद्देश्य देश में खेल सामग्री के घरेलू विनिर्माण, निवेश, अनुसंधान, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देना है।
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पीएम मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को मंजूरी दे दी है। वर्ष 2026 से 2033-34 तक लागू होने वाली इस योजना पर कुल 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत में खेल सामग्री के विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस योजना के जरिए देश में खेल सामग्री निर्माण के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

खेल सामग्री निर्माण के लिए बनेंगे विशेष औद्योगिक क्षेत्र
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योजना के तहत ‘स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन’ (एसजीएमजेड) विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में खेल सामग्री निर्माता कंपनियों, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण केंद्रों, डिजाइन एवं प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और सहायक उद्यमों को एक ही स्थान पर लाने की योजना है। इन जोन को ‘भव्य’ योजना और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) के औद्योगिक पार्कों के साथ जोड़कर विकसित किया जाएगा। इससे विनिर्माण प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि एकीकृत औद्योगिक ढांचे से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, परिचालन लागत कम करने और खेल सामग्री उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

1,130 करोड़ रुपये से निवेश और उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
योजना में निवेश आकर्षित करने और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कुल 1,130 करोड़ रुपये के प्रावधान वाले उपाय शामिल हैं। इसके तहत दो प्रमुख घटकों पर ध्यान दिया जाएगा।
  • एंकर इन्वेस्टमेंट सपोर्ट: घरेलू और वैश्विक निर्माताओं, ब्रांडों तथा रिटेल चेन को खेल सामग्री निर्माण क्षेत्रों में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • टर्नओवर लिंक्ड सपोर्ट: उत्पादन बढ़ाने, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने और उद्योग में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहायता दी जाएगी।
  • इन उपायों से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने, घरेलू स्तर पर मूल्यवर्धन बढ़ने और खेल सामग्री की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
एमएसएमई और मौजूदा औद्योगिक क्लस्टरों पर भी जोर
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खेल सामग्री उद्योग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए योजना में मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत पुराने क्लस्टरों के उन्नयन, साझा सुविधाओं के विकास और आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए सहायता दी जाएगी। इससे छोटे निर्माताओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 105 करोड़ रुपये
भारतीय खेल सामग्री को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए 105 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस राशि के माध्यम से निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और प्रमाणन का नवीनीकरण कराने में सहायता दी जाएगी। इस पहल से भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अनुसंधान, तकनीक और नवाचार को मिलेगा प्रोत्साहन
योजना के तहत खेल उपकरणों, सामग्री विज्ञान, सुरक्षा उपकरणों और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने में मदद दी जाएगी। साथ ही, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के साथ तालमेल बनाकर अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के अनुरूप स्टार्टअप्स को भी सहायता मिलेगी। इससे खेल सामग्री के क्षेत्र में नई तकनीकों, उत्पादों और विनिर्माण प्रक्रियाओं के विकास, परीक्षण तथा व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

उद्योग की जरूरतों के मुताबिक तैयार होंगे कुशल कर्मचारी
खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए योजना के तहत कौशल विकास पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और उद्योग से जुड़े पक्षों के सहयोग से प्रशिक्षण संबंधी पहलें लागू की जाएंगी। इसका उद्देश्य उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करना और विनिर्माण क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को गति देना है।

वैश्विक बाजार में भारतीय खेल सामग्री की बढ़ेगी पहचान
योजना के तहत भारतीय खेल सामग्री को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करने के लिए ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और बाजार विकास संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए ‘निर्यात संवर्धन मिशन’ का लाभ उठाने की भी योजना है। सरकार का लक्ष्य भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत करना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और खेल सामग्री के निर्यात में वृद्धि करना है।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी मजबूती
यह योजना ‘खेलो भारत नीति 2025’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार की गई है। इससे घरेलू विनिर्माण, निजी निवेश, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर गुणवत्ता वाली और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सामग्री के निर्माण से ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों को भी समर्थन मिलेगा। साथ ही, खिलाड़ियों और खेल विकास कार्यक्रमों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के माध्यम से भारत खेल सामग्री के डिजाइन, विकास और निर्माण के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सकेगा। यह पहल देश की औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ निर्यात, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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