भारतीय मूल की शतरंज खिलाड़ी बोधना सिवानंदन ने महज 11 साल की उम्र में नया इतिहास रच दिया है। इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व कर रहीं बोधना ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 46वें शतरंज ओलंपियाड के दौरान सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया।
इंग्लैंड के टॉप बोर्ड पर खेलीं सभी 11 बाजियां
इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (फिडे) ने बोधना की इस उपलब्धि की पुष्टि की है। उन्होंने शतरंज ओलंपियाड में इंग्लैंड के पहले बोर्ड पर सभी 11 राउंड खेले और टूर्नामेंट का समापन 8 अंकों के साथ किया। पहले बोर्ड पर आमतौर पर टीम के शीर्ष खिलाड़ी को उतारा जाता है अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बोधना ने फिडे से कहा, 'मैं इसे हासिल करके खुश हूं, लेकिन मैं यहीं रुकना नहीं चाहती। मैं आगे भी खेलना और इतिहास बनाना चाहती हूं।'
इंटरनेशनल मास्टर बनने की ओर एक और कदम
ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन के दौरान बोधना ने अपना दूसरा इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) नॉर्म भी हासिल किया। इसके साथ ही वह इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल करने के और करीब पहुंच गई हैं।
लॉकडाउन में शुरू किया था शतरंज खेलना
बोधना का शतरंज का सफर भी काफी दिलचस्प है। कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में उन्होंने पहली बार शतरंज खेलना शुरू किया था। उनके पिता के दोस्त भारत लौट रहे थे और उन्होंने कुछ बैग बोधना के परिवार को दिए थे, जिनमें एक शतरंज बोर्ड भी था। इसके बाद बोधना ने खुद ही शतरंज सीखना शुरू किया और देखते ही देखते इस खेल में अपनी अलग पहचान बना ली। बोधना अपने परिवार के साथ उत्तर-पश्चिम लंदन के हैरो में रहती हैं और नियमित स्कूलिंग भी करती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शतरंज के सिलसिले में यात्रा करना पसंद है और खेल उनके स्कूल के कई विषयों से भी जुड़ता है।
पहले भी कई रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं
- बोधना ने हाल के वर्षों में कई रिकॉर्ड बनाए हैं।
- पिछले महीने ही उन्होंने 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया था।
- तेज प्रारूपों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है।
- वह यूके ओपन महिला ब्लिट्ज चैंपियन हैं और ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन का खिताब साझा रूप से अपने नाम कर चुकी हैं।
- महज 11 साल की उम्र में महिला ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करना बोधना के तेजी से आगे बढ़ते शतरंज करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है।