मुक्केबाजी में भारत को एक और ओलंपिक कोटा मिल सकता है क्योंकि राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता जैस्मीन लम्बोरिया विश्व ओलंपिक मुक्केबाजी क्वालीफायर के 57 किग्रा क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड की एना मारिजा मिलिसिक पर शानदार जीत दर्ज करके पेरिस ओलंपिक कोटा हासिल करने के करीब पहुंच गई हैं। भारत की इस 22 साल की खिलाड़ी ने अंतिम 16 मुकाबले में जजों के सर्वसम्मत निर्णय (5-0) से मिलिसिक को शिकस्त दी। निशांत देव ( 71 किग्रा) के अलावा महिला वर्ग में निकहत जरीन (50 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा) और लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) पहले ही पेरिस के लिए अपना स्थान पक्का कर चुके हैं।
क्वार्टर फाइनल में जीत दिलाएगा ओलंपिक कोटा
क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में महिलाओं के 57 किग्रा भार वर्ग में चार कोटा स्थान है। जैस्मीन को पेरिस खेलों में अपनी जगह पक्की करने और भारत के लिए 57 किग्रा कोटा पुनः प्राप्त करने के लिए रविवार को अपना क्वार्टर फाइनल जीतना होगा। परवीन हुड्डा ने 2023 एशियाई खेलों में 57 किग्रा कोटा हासिल किया था, लेकिन पिछले महीने डोपिंग के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था, जिससे भारत को कोटा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जैस्मीन ने तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया
जैस्मीन ने एशियाई खेलों और ओलंपिक के पहले क्वालीफायर में 60 किग्रा में चुनौती पेश की थी लेकिन टूर्नामेंट में रिजर्व के रूप में सूचीबद्ध होने के कारण उन्हें 57 किग्रा में भाग लेने की अनुमति मिल गई। जैस्मीन और मिलिसिक ने शुरुआत में एक-दूसरे को आंकने पर ध्यान दिया। जैस्मीन ने इसके बाद अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया और मिलिसिक लगातार मुक्के बरसाये। स्विट्जरलैंड की खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की लेकिन जैस्मीन उनसे दूरी बनाए रखने में सफल रहीं। जैस्मीन ने अपनी कद का इस्तेताल करते हुए मिलिसिक पर दबाव बनाए रखा।
सचिन का सफर सेमीफाइनल में समाप्त
पुरुषों के 57 किग्रा में पूर्व युवा विश्व चैंपियन सचिन सिवाच ने 57 किग्रा सेमीफाइनल में अच्छी कोशिश की, लेकिन टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता फिलीपींस के कार्लो पालम से 0-5 से हार गए। सचिन को ओलंपिक कोटा हासिल करने का हालांकि एक और मौका मिलेगा क्योंकि 57 किग्रा में तीन कोटे उपलब्ध हैं। सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों मुक्केबाज सचिन और किर्गिस्तान के मुनारबेक सेइटबेक उउल रविवार को कोटा स्थान के लिए एक-दूसरे से भिड़ेंगे। सचिन ने बहुत कोशिश की लेकिन पालम के मुक्कों का करारा जवाब नहीं दे सके। फिलीपींस के मुक्केबाज को मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक रूख अपनाने का फायदा मिला। सचिन को रक्षात्मक खेल खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।