भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के रिकॉर्ड 10 पदकों के प्रदर्शन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि एशियाई खेलों में इस उपलब्धि को दोहराना आसान नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय मुक्केबाज वहां भी देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से चार अक्तूबर तक जापान में होगा।
भारत ने मुक्केबाजी में किया रिकॉर्ड प्रदर्शन
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रिकॉर्ड सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रचा। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में मुक्केबाजी में यह किसी भी देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। अजय सिंह ने कहा, पिछले दो दिन हमारे लिए असाधारण और ऐतिहासिक रहे। मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतना राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पांच महिला मुक्केबाजों का स्वर्ण पदक जीतना इस सफलता को और भी खास बनाता है। हमें इस बात पर भी गर्व है कि भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से सात मुक्केबाजी से आए हैं।
बीएफआई अध्यक्ष ने कहा कि यह सफलता भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी का भी हिस्सा है। उन्होंने कहा, यह प्रदर्शन एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक की हमारी तैयारियों का भी संकेत है। आप जानते हैं कि विश्व मुक्केबाजी में भारत की रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भारत अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2016 में हम शीर्ष 40 में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
अजय सिंह बोले- एशियाड में चुनौती अधिक कठिन होगी
अजय सिंह ने स्वीकार किया कि एशियाई खेलों की चुनौती कहीं अधिक कठिन होगी। उन्होंने कहा, राष्ट्रमंडल खेलों जैसी सफलता को एशियाई खेलों में दोहराना काफी मुश्किल होगा। एशियाई खेल हमारे लिए लगभग ओलंपिक जैसी चुनौती हैं। दुनिया के शीर्ष मुक्केबाजी देशों में कजाखस्तान, उजबेकिस्तान और भारत शामिल हैं। इसके अलावा चीन के मुक्केबाज भी बेहद मजबूत हैं। ऐसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा, लेकिन हमें भरोसा है कि हमारी टीम अच्छा करेगी। एशियाई खेलों में यदि आप बड़ी संख्या में पदक जीतते हैं, तो ओलंपिक में भी पदक जीतने की संभावना बढ़ जाती है।