पुरुष वर्ग के गत चैंपियन समीर वर्मा पर अपना खिताब बरकरार रखने की चुनौती होगी। उन्हें हमवतन श्रीकांत और एचएस प्रणय के अलावा विदेशी खिलाड़ियों की चुनौती से भी पार पाना होगा।
समीर की निगाह खिताब बरकरार रखकर साल के अंत में होने वाले वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालिफाई करने की होगी। मिश्रित युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और एन सिक्की रेड्डी भी अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगे।
राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन साइना घर में इस साल की अपनी पहली बीडब्ल्यूएफ ट्रॉफी जीतना चाहेंगी। एशियन खेलों की कांस्य पदक विजेता साइना अपने अभियान की शुरुआत मॉरीशस की केट फू कुने के खिलाफ करेंगी।
साइना इस साल इंडोनेशिया मास्टर्स और डेनमार्क ओपन के फाइनल में पहुंचीं पर ट्रॉफी नहीं जीत पाईं।
पिछले साल चार सुपर सीरीज जीतने वाले श्रीकांत को भी इस सत्र के अपने पहले खिताब की तलाश है। राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता श्रीकांत की राह आसान नहीं है। उन्हें दूसरी वरीय एचएस प्रणय और समीर से पार पाना होगा जिन्होंने क्रमश: हैदराबाद ओपन और स्विस ओपन जीता है।
दूसरे दौर में श्रीकांत का सामना 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन पी कश्यप से हो सकता है। कश्यप को पहले दौर में थाईलैंड के तनोंगसक से खेलना है। प्रणय अपने अभियान की शुरुआत थाईलैंड के अदुरिच नामकुल के खिलाफ, जबकि बीसाई प्रणीत रूस के सेर्गेई सिरेंट के खिलाफ करेंगे।
शुभंकर डे चीन के झोऊ जिकी के विरुद्ध खेलेंगे। इसके अलावा सौरव वर्मा और पुरुष युगल में सात्विसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, मनु अत्री और सुमित रेड्डी, जबकि महिला युगल में अश्विनी पोनप्पा और सिक्की की जोड़ी भी घर में दम दिखाएंगे।
वर्ष 1991 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट को वर्ष 2003 तक राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप के तौर पर खेला जाता था। वर्ष 2004 में इसे अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। वर्ष 2011 में इसे बीडब्ल्यूएफ ग्रां प्री गोल्ड टूर्नामेंट का दर्जा मिला। इस टूर्नामेंट का नामकरण वर्ष 1982 में राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुष एकल स्पर्धा के विजेता सैयद मोदी के नाम पर हुआ था।