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सभी मैच जीतना संभव नहीं, आलोचना या उम्मीदों के बोझ का नहीं पड़ता असर'

Thu, 02 Jan 2020 05:58 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला

सार

-01 खिताब जीत पाईं सिधू 2019 में, एक में उपविजेता और दो में सेमीफाइनल तक पहुंचीं
-07 टूर्नामेंट के पहले और दूसरे दौर में ही हो गईं बाहर  
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पीवी सिंधु - फोटो : ट्विटर
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विस्तार
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आलोचना या उम्मीदों के बोझ से विश्व चैंपियन शटलर पीवी सिंधु पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि वह इस साल टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के लिए अपने खेल में सुधार करने पर ध्यान दे रही हैं। सिंधु ने 2019 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता लेकिन सत्र के बाकी टूर्नामेंट में से अधिकतर में वह शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ पाईं। 

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उन्होंने कहा,‘विश्व चैंपियनशिप मेरे लिए वास्तव में शानदार रही लेकिन इसके बाद मैं पहले दौर में हारती रही। इसके बावजूद मैंने खुद को सकारात्मक बनाए रखा। आप सभी मैच जीतो यह संभव नहीं है। कुछ मौकों पर आप बेहतरीन खेल दिखाते हो लेकिन कभी आप गलतियां भी करते हो। मैंने इन गलतियों से काफी कुछ सीखा। मेरे लिए सकारात्मक बने रहना और दमदार वापसी करना महत्वपूर्ण है। मुझसे निश्चिततौर पर काफी उम्मीदें होंगी लेकिन दबाव और आलोचना मुझे प्रभावित नहीं करती, क्योंकि लोग मुझसे हमेशा जीत की उम्मीद करते हैं। ओलंपिक किसी के लिए भी अंतिम लक्ष्य होता है। हम तकनीक और कौशल पर काफी काम कर रहे हैं। सब कुछ सुनियोजित होगा और ओलंपिक  सत्र में सब कुछ अच्छा होगा।’
 

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सुशील की बराबरी का मौका

रियो ओलंपिक में रजत जीतने वाली 24 वर्षीय हैदराबादी खिलाड़ी केपास टोक्यो में पदक जीतकर पहलवान सुशील कुमार के दो पदक की बराबरी करने का मौका रहेगा। सुशील ने 2008 और 2012 में ओलंपिक पदक जीते थे। सिंधु ने कहा, ‘उन्होंने (सुशील) वास्तव में देश के लिए बहुत अच्छा काम किया है। मुझे उम्मीद है कि मैं भी पदक जीतने में सफल रहूंगी। मैं दूसरों के बारे में नहीं सोचती। मैं कदम दर कदम आगे बढ़ने में विश्वास करती हूं। इसलिए मुझे लगता है कि मुझे कड़ा अभ्यास और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की जरूरत है। यह हालांकि आसान नहीं होगा। इस बार 2020 में हम जनवरी में मलयेशिया और इंडोनेशिया से शुरुआत करेंगे। इसके अलावा ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए कुछ टूर्नामेंट हैं।’
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