17 साल के लक्ष्य पांच साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं। सच्चाई यह है कि जब से उन्होंने होश संभाला बैडमिंटन को अपने आसपास पाया। उनके पिता डीके सेन बैडमिंटन के साई कोच हैं, जबकि भाई चिराग सेन भी बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। यही नहीं उनके दादा नामी बैडमिंटन खिलाड़ी थे। बैडमिंटन की शिक्षा-दीक्षा उन्होंने अपने पिता से ही अल्मोड़ा में ली, इसके बाद उन पर नजर प्रकाश पादुकोण पर पड़ी, पिछले सात-आठ सालों से वह बंगलूरू में प्रकाश अकादमी में ही प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।
जीत से बढ़ेगा हौसला
मैं इस टूर्नामेंट को जीतकर खुश हूं। इससे मेरा हौसला बढ़ेगा। मैं टीम और व्यक्तिगत मुकाबलों में खेला, इस लिए यह मेरे लिए लंबा टूर्नामेंट था। मुझे खुशी है कि मैं अच्छा खेल सका और जीता। मैं पहले भी इन खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं और उनका खेल अच्छी तरह जानता था।