ज्वाला के अनुसार आज वह जो कुछ भी हैं द्रोणाचार्य अवार्डी गुरु मोहम्मद आरिफ की वजह से हैं। वह उन्हें भूल नहीं सकती हैं। उन्होंने अकादमी का मेंटर आरिफ को बनाया है। उन्होंने अकादमी भारतीय कोच गोपीचंद से किसी वैमनस्यता की वजह से नहीं खोली है। गोपीचंद अकादमी भी शहर में है इससे स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा होगी जिसका फायदा खेलों को ही मिलेगा।
रियो ओलंपिक के बाद ज्वाला को अचानक टीम से बिना किसी कारण बाहर कर दिया गया था। उन्हें इसकी सूचना तक नहीं दी गई। इसका दुख उन्हें आज भी है। वह कहती हैं कि उन्हें कम से कम इसका कारण बताना चाहिए था, लेकिन उन्हें मालूम है यह सब किसकी वजह से हुआ। उन्होंने अभी तक संन्यास नहीं लिया है और अपनी अकादमी में बच्चों के लिए वह फिर रैकेट उठाएंगी।