18 वर्षीय अमेरिकी बैडमिंटन खिलाड़ी गैरेट टैन बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में सिर्फ अनुभव हासिल करने दिल्ली आया था और शुक्रवार की वापसी की फ्लाइट भी बुक थी। लेकिन दुनिया के 92वें नंबर के खिलाड़ी ने भारत के स्टार लक्ष्य सेन को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। अब वह प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुका है।
किसी बड़े टूर्नामेंट में पहली बार उतरने वाले खिलाड़ी के लिए विश्व चैंपियनशिप का अनुभव ही बड़ी बात होता है। अमेरिकी खिलाड़ी गैरेट टैन भी कुछ ऐसी ही सोच के साथ दिल्ली पहुंचे थे। 18 साल के इस खिलाड़ी ने अपनी वापसी की फ्लाइट शुक्रवार के लिए बुक कर रखी थी। उनका इरादा विश्व चैंपियनशिप में खेलने, अनुभव हासिल करने और फिर घर लौटने का था, लेकिन बुधवार को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में जो हुआ, उसने उनकी पूरी योजना बदल दी।
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दुनिया के 92वें नंबर के खिलाड़ी गैरेट टैन ने भारत के 14वीं वरीयता प्राप्त लक्ष्य सेन को 73 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में 19-21, 21-19, 21-17 से हरा दिया। यह उनके करियर की सबसे बड़ी जीतों में से एक है। इस जीत के साथ टैन विश्व चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं। जब उनसे पूछा गया कि शुक्रवार की फ्लाइट का क्या होगा, तो टैन हंस पड़े। उन्होंने कहा, 'मुझे शुक्रवार को जाना था, लेकिन लगता है अब मुझे देखना पड़ेगा कि आगे क्या होता है।'
VIDEO | BWF WC'ship: 'This is definitely the biggest win of my career,' says Garrett Tan after stunning Lakshya Sen. pic.twitter.com/0OZ6C8jnxo
लक्ष्य सेन को दिल्ली में हराना किसी विदेशी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं था। स्टेडियम में बड़ी संख्या में भारतीय प्रशंसक मौजूद थे। ढोल बज रहे थे, लगातार शोर हो रहा था और हर रैली में दर्शक लक्ष्य का उत्साह बढ़ा रहे थे, लेकिन टैन ने माहौल को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया। उनके खेल में बैककोर्ट से ताकत, रैलियों में धैर्य और नेट पर शटल को जल्दी लेने का साहस दिखाई दिया।
पहला गेम लक्ष्य ने 21-19 से अपने नाम किया, लेकिन टैन पीछे नहीं हटे। उन्होंने दूसरे गेम में 21-19 से वापसी की और मुकाबला निर्णायक गेम में पहुंच गया। तीसरे गेम में स्कोर 17-17 से बराबर था। यहीं 18 वर्षीय अमेरिकी खिलाड़ी ने अपना धैर्य बनाए रखा और लगातार अंक हासिल करते हुए गेम 21-17 से जीत लिया। मैच खत्म होते ही स्टेडियम का शोर थम गया। लक्ष्य ने मैच के बाद अपने प्रतिद्वंद्वी की तारीफ करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि यह एक अच्छा मैच था। मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को काफी श्रेय देता हूं। उसने बहुत ठोस खेल दिखाया।'
गैरेट
- फोटो : BAI
कौन हैं गैरेट टैन?
गैरेट टैन अमेरिका के उभरते हुए बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह जूनियर स्तर पर दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भी रह चुके हैं। फिलहाल अमेरिकी जूनियर रैंकिंग में वह सातवें स्थान पर हैं, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान सीनियर सर्किट में पहचान बनाने पर है।
टैन ने आठ साल की उम्र में प्रशिक्षण शुरू किया था और 14 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना शुरू कर दिया। पिछले साल उन्होंने पैन अमेरिकन जूनियर चैंपियनशिप का खिताब जीता था। इस प्रतियोगिता को इससे पहले विक्टर लाई जैसे खिलाड़ियों ने जीता था, जो बाद में विश्व के शीर्ष-10 में पहुंचे।
पिछले साल गुवाहाटी में आयोजित विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी टैन प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। इस साल उन्होंने सीनियर स्तर पर नियमित रूप से खुद को परखना शुरू किया। मार्च में ब्राजील इंटरनेशनल और जुलाई में साइपन इंटरनेशनल में उन्होंने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया।
लक्ष्य के वीडियो देखकर नहीं की थी खास तैयारी
दिलचस्प बात यह है कि टैन ने लक्ष्य सेन के खिलाफ मुकाबले से पहले उनके खेल के बहुत सारे वीडियो देखने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने लक्ष्य के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए उनके काफी वीडियो देखे थे, तो उन्होंने इससे इनकार किया। टैन ने कहा, 'नहीं, वास्तव में ऐसा नहीं किया। मैं बस मैदान पर जाना चाहता था, अपना सर्वश्रेष्ठ खेलना चाहता था और यह नहीं सोचना चाहता था कि मेरे सामने कौन खड़ा है।' यही बेफिक्री उनके खेल में भी नजर आई। बड़े नाम और घरेलू दर्शकों के दबाव के बावजूद उन्होंने अपना ध्यान सिर्फ खेल पर रखा।
बचपन की कोच ने बताया क्यों खास हैं टैन
टैन की बचपन से कोच काओ हॉक पॉला लिन उन्हें काफी करीब से जानती हैं। उनके मुताबिक टैन बचपन से ही बेहद जिज्ञासु खिलाड़ी रहे हैं और लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने के बारे में सवाल करते थे। पॉला ने कहा, 'वह पहले भी और अब एक खिलाड़ी के तौर पर भी हमेशा जिज्ञासु रहा है। वह पूछता रहता है कि मैं इसमें कैसे अच्छा कर सकता हूं? मुझे किस चीज पर काम करना चाहिए? उसके मन में हमेशा अच्छे सवाल होते हैं।'
उन्होंने टैन की एक और खासियत बताते हुए कहा, 'एक खिलाड़ी के तौर पर आपको कोच की बात मानने और उससे सीखने वाला होना चाहिए। अलग-अलग कोच अलग राय और सलाह दे सकते हैं, लेकिन आपको खिलाड़ी के रूप में सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए और उन सकारात्मक चीजों को अपने खेल में जोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।'
गैरेट और पॉला
- फोटो : PTI/BAI
दिल्ली में नहीं था बड़ा कोचिंग स्टाफ
टैन का सपोर्ट सिस्टम भी सामान्य खिलाड़ियों की तरह बड़ा नहीं है। वह मुख्य रूप से लॉस एंजिल्स में अकेले ट्रेनिंग करते हैं और कुछ समय ताइवान में भी प्रशिक्षण लेते हैं। उनके माता-पिता ताइवान में रहते हैं। उनकी मां टूर्नामेंट के दौरान उनके साथ रहती हैं और मैनेजर की भूमिका भी निभाती हैं। दिल्ली में उनकी बचपन की कोच पॉला सपोर्ट टीम का हिस्सा थीं, जबकि अमेरिकी खिलाड़ी लॉरेन लैम ने लक्ष्य के खिलाफ मुकाबले में कोचिंग चेयर संभाली।
पॉला ने कहा, 'आज हमने दोनों तरह से काम किया। लॉरेन भी इसमें शामिल थीं। वह पहले सिंगल्स खेल चुकी हैं, इसलिए यह पूरी टीम का प्रयास था।' लक्ष्य के नेट पर दबाव बनाने की क्षमता को देखते हुए टैन को बैकलाइन से खेलने और फ्रंट कोर्ट के आदान-प्रदान से दूर रहने की रणनीति दी गई थी। पॉला ने कहा, 'हमने देखा कि लक्ष्य फ्रंट में गैरेट पर काफी दबाव बनाने में बहुत अच्छे हैं। इसलिए हम गैरेट को फ्रंट से दूर रखना चाहते थे।'
भीड़ और दबाव से निपटने की पहले से थी तैयारी
दिल्ली की भीड़ के बारे में भी टैन की टीम पहले से तैयार थी। पॉला ने बताया कि उन्हें पहले ही समझाया गया था कि घरेलू खिलाड़ी के पक्ष में शोर और समर्थन होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, 'हमने पहले से इसकी उम्मीद की थी। जाहिर तौर पर यह घरेलू फायदा था। हमने इस बारे में बात की थी कि दर्शकों के चिल्लाने या समर्थन करने की चिंता नहीं करनी है। हमने मानसिक रूप से खुद को तैयार किया था कि ऐसा होने वाला है और हमें सिर्फ उन चीजों पर ध्यान देना है जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं।'
निर्णायक गेम में एक समय टैन डाइव लगाते हुए अपना सिर भी चोटिल कर बैठे और उन्हें चक्कर जैसा महसूस हुआ। कोचिंग चेयर पर मौजूद लॉरेन ने उन्हें सिर्फ अपना ध्यान अगले अंक पर लगाने को कहा। उन्होंने कहा, 'मैंने उससे कहा कि बस खुद को रीसेट करो। एक खिलाड़ी के तौर पर जब आप ऐसी स्थिति से गुजरते हैं तो आप एक समय में बहुत कुछ नहीं ले सकते। इसलिए मैंने उससे कहा कि अपना संयम बनाए रखो, ध्यान केंद्रित करो और सिर्फ उस मौजूदा अंक पर ध्यान दो।'
'मेरे लिए छोटे भाई जैसा है'
लॉरेन लैम टैन को सिर्फ टीम के साथी की तरह नहीं देखतीं। वह उन्हें छोटे भाई जैसा मानती हैं। उन्होंने टैन की मेहनत और समर्पण की भी तारीफ की। लॉरेन ने कहा, 'वह मेरे छोटे भाई जैसा है। वह बहुत मेहनती है। वह ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाला और अपने खेल के प्रति बहुत समर्पित है। वह वास्तव में मुझे भी प्रेरित करता है। एक बड़ी बहन के तौर पर जब मैं अपने छोटे भाई को इतनी मेहनत करते देखती हूं तो मुझे भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। हम एक-दूसरे को आगे बढ़ाते हैं।' उन्होंने विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर टैन के धैर्य की भी तारीफ की। लॉरेन ने कहा, '18 साल के बच्चे के लिए मैं वास्तव में प्रभावित हुई। यह बहुत प्रभावशाली है कि वह अपना ध्यान बनाए रख सकता है और इतने दबाव को संभाल सकता है। यह विश्व चैंपियनशिप है, सबसे बड़ा टूर्नामेंट।'
अब सामने दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी
टैन की कहानी की सबसे खास बात यह है कि वह दिल्ली सिर्फ अनुभव लेने आए थे। उनके पास शुक्रवार की वापसी की टिकट थी और उनके साथ कोई बड़ा कोचिंग दल भी नहीं था। लेकिन लक्ष्य सेन को हराने के बाद अब उनका सफर आगे बढ़ चुका है। विश्व चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में उनके सामने दुनिया के नंबर दो खिलाड़ी कुनलावुत वितिदसर्न की चुनौती है। यानी शुक्रवार को घर लौटने के बजाय टैन के पास दिल्ली में रुकने की एक बड़ी वजह है। जिस खिलाड़ी ने इस टूर्नामेंट को अपने करियर का अनुभव लेने का मौका माना था, अब वही 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियनशिप के बड़े दावेदारों में से एक को चुनौती देने जा रहा है।