एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाज स्वाति चौधरी ने इतिहास रच दिया। मेरठ की 37 वर्षीय खिलाड़ी ने गुरुवार को महिला व्यक्तिगत डब्ल्यू1 स्पर्धा में रजत पदक जीता। वह इस वर्ग में एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गईं। हालांकि, स्वर्ण पदक के मुकाबले में उन्हें चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, पैरा बैडमिंटन में भारत ने दो कांस्य पदक भी अपने नाम किए।
स्वाति
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4-2 की बढ़त के बाद स्वाति से दूर हुआ स्वर्ण
शीर्ष वरीयता प्राप्त स्वाति ने फाइनल में अच्छी शुरुआत की। उन्होंने पहले सेट में 25-17 से जीत दर्ज कर 2-0 की बढ़त बनाई। दूसरे सेट में चीन की सेन मेंगकान ने वापसी की और 22-21 से जीत हासिल कर मुकाबला 2-2 से बराबर कर दिया। तीसरे सेट में स्वाति ने फिर बाजी मारी। उन्होंने 22-21 से सेट जीतकर 4-2 की बढ़त हासिल की और स्वर्ण पदक से केवल एक सेट दूर रह गईं। हालांकि, चौथे सेट में चीनी तीरंदाज ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तीनों तीरों से 10-10 अंक हासिल करते हुए 30-20 से सेट जीत लिया। इससे स्कोर 4-4 हो गया।
निर्णायक सेट में सेन मेंगकान ने अपना संयम बनाए रखा और 28-21 से जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस तरह स्वाति को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। दुनिया की 23वें नंबर की चीनी खिलाड़ी ने इस जीत के साथ एशियन पैरा गेम्स में अपना पहला स्वर्ण पदक भी हासिल किया।
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आर्थिक चुनौतियों के बावजूद शानदार प्रदर्शन
स्वाति मेरठ की गुरुकुल आर्चरी अकादमी में एथेंस ओलंपियन सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं। आर्थिक सीमाओं के कारण उन्हें बड़े अंतरराष्ट्रीय ट्रायल में हिस्सा लेने में मुश्किलें आई हैं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। 2026 में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में उन्होंने तीन रजत पदक जीते थे। ये पदक महिला डब्ल्यू1 व्यक्तिगत, महिला डब्ल्यू1 टीम और डब्ल्यू1 मिश्रित टीम स्पर्धाओं में आए थे। इसके अलावा, उन्होंने 2025 की पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय चैंपियनशिप और खेलो इंडिया पैरा गेम्स में महिला डब्ल्यू1 वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था।
स्वाति को सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर (एसीटीसी) योजना के तहत प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए 51,99,651 रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। डब्ल्यू1 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनके हाथों और पैरों दोनों के कामकाज पर गंभीर असर डालने वाली शारीरिक दिव्यांगता होती है। इसमें टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों वाले खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं।
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पैरा बैडमिंटन में भारत को दो कांस्य
पैरा बैडमिंटन में भारत की दो जोड़ियों ने कांस्य पदक जीते। मिश्रित युगल एसएच6 वर्ग में कृष्णा नागर और नित्या श्री को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की रीना मार्लीना और सुब्हान के खिलाफ हार मिली। इसके बावजूद भारतीय जोड़ी ने कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
वहीं, मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में मनीषा रामदास और प्रमोद भगत ने भी कांस्य पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया की लेआनी रात्री ओक्टिला और हिकमत रामदानी के खिलाफ पहला गेम 21-16 से जीता, लेकिन अगले दो गेम 13-21 और 17-21 से गंवा दिए। इस हार के साथ उनकी फाइनल में पहुंचने की उम्मीद समाप्त हो गई। स्वाति के ऐतिहासिक रजत और बैडमिंटन में दो कांस्य पदकों के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने नागोया में अपने पदक अभियान को आगे बढ़ाया।