यामाशिता ने घरेलू दर्शकों के सामने जीता स्वर्ण
29 वर्षीय इचिटाका यामाशिता ने 2:10:51 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। वह एशियन गेम्स की मैराथन में स्वर्ण जीतने वाले जापान के सातवें एथलीट बने। घरेलू धरती पर इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले वह जापान के पहले एथलीट भी हैं यामाशिता ने रेस के दौरान सावन पर बढ़त बनाए रखी। वह जब स्टेडियम में पहुंचे तो घरेलू दर्शकों ने जोरदार समर्थन के साथ उनका स्वागत किया और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
44 साल बाद लौटा मैराथन पदक
भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन का पहला पदक 1951 में जीता था। छोटा सिंह ने स्वर्ण और सुरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद 1982 में होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने कांस्य जीता। अब 2026 में सावन बरवाल ने रजत जीतकर इस सूची में अपना नाम जोड़ लिया है।
एशियाड में मैराथन में भारत के पदक
| वर्ष |
खिलाड़ी |
पदक |
समय |
| 1951 |
छोटा सिंह |
स्वर्ण |
2:42:58.6 |
| 1951 |
सुरत सिंह माथुर |
कांस्य |
2:53:49.8 |
| 1982 |
होसुर कुक्कप्पा सीतारन |
कांस्य |
2:25:07 |
| 2026 |
सावन बरवाल |
रजत |
2:11:36 |