दोस्त और रिश्तेदार, साथ ही शुरू किया सफर
इस पूरी कहानी में एक चीज लगातार कायम रही और वह है दोनों की दोस्ती। मनु और प्रिंस दोस्त होने के साथ-साथ रिश्तेदार भी हैं। दोनों ने सेलिंग में कदम भी साथ ही रखा था। उस समय वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। नेशनल सेलिंग स्कूल के कोच पी. मधु की नजर दोनों की प्रतिभा पर पड़ी। उन्होंने दोनों युवाओं को इस खेल को गंभीरता से लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद दोनों ने अगले दो साल भोपाल स्थित नेशनल सेलिंग स्कूल में ट्रेनिंग की और फिर अपने घर केरल लौट आए।
केरल लौटे, लेकिन ट्रेनिंग नहीं छोड़ी
केरल लौटने के बाद दोनों ने मुजिरिस यॉटिंग क्लब में रिटायर्ड कर्नल नवनीत मित्तल और सुरेश पिल्लई के मार्गदर्शन में अपनी स्किल को निखारा। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद भी सेलिंग के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। प्लस टू की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों भारतीय सेना में शामिल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने सेलिंग जारी रखी और खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
2020 से संदीप जैन की निगरानी में तैयारी
2020 से दोनों को संदीप जैन कोचिंग दे रहे हैं। इसके बाद उनकी तैयारियां मुंबई स्थित आर्मी यॉटिंग नोड में और मजबूत हुईं, जहां दोनों ने बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए गहन ट्रेनिंग की।
2010 में शुरू हुई प्रतिस्पर्धी यात्रा
मनु और प्रिंस की प्रतिस्पर्धी यात्रा 2010 में सिल्वर जुबली नेशनल लेजर रेगाटा से शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों ने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा और स्किफ वर्ग में एक मजबूत और नियमित जोड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई।
एशियन चैंपियनशिप में दो बार कांस्य
दोनों ने 2022 में अबू धाबी में हुई एशियन सेलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इसके एक साल बाद थाईलैंड में भी उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। अब एशियन गेम्स में पदार्पण करते हुए दोनों ने भारत के लिए स्किफ में सिल्वर मेडल जीत लिया है। उनकी कोशिश सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारत में सेलिंग को फिर से पहचान दिलाने की भी थी। चेराई बीच की जुगाड़ वाली नाव से शुरू हुआ उनका सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है।