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85 पदकों की कहानी: पुराने गढ़ कमजोर, नए में बादशाहत; सात स्वर्ण और 21 पदक घटे, फिर चौथे नंबर पर भारत

Mon, 05 Oct 2026 09:16 AM IST
स्वप्निल शशांक अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

नागोया एशियाई खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण समेत 85 पदक जीतकर अपना अभियान चौथे स्थान पर खत्म किया। हांगझोउ के 106 पदकों के मुकाबले इस बार 21 पदक कम आए। एथलेटिक्स और शूटिंग जैसे पुराने गढ़ कमजोर रहे, लेकिन तीरंदाजी, बॉक्सिंग, कुश्ती और टीम खेलों ने नए सितारों के साथ भारत की उम्मीदें बढ़ाईं।
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अनाहत, दीपिका और जोशन चिनप्पा - फोटो : Instagram
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विस्तार
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एशियाई खेलों में भारतीय दल का अभियान 21 स्वर्ण समेत 85 पदकों के साथ समाप्त हुआ। यह एशियाई खेलों में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, लेकिन हांगझोउ के मुकाबले इस बार भारत ने सात स्वर्ण समेत कुल 21 पदक कम जीते। हांगझोउ में भारत ने 28 स्वर्ण समेत 106 पदक जीते थे। इसके बावजूद अच्छी बात यह रही कि भारत जापान में भी पिछली बार की तरह पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।

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हांगझोउ में भारत के शानदार प्रदर्शन में शूटिंग और एथलेटिक्स का बड़ा योगदान था। शूटिंग से सात और एथलेटिक्स से छह स्वर्ण आए थे। इस बार शूटिंग से तीन और एथलेटिक्स से सिर्फ एक स्वर्ण मिला। एथलेटिक्स में पिछली बार 29 पदक आए थे, जबकि इस बार 24 पदक मिले। शूटिंग का पदक आंकड़ा भी 22 से घटकर 15 हो गया। बैडमिंटन, टेनिस, रोइंग और घुड़सवारी भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। इन खेलों में प्रदर्शन बेहतर रहता तो भारत एक बार फिर पदकों का शतक लगा सकता था। हालांकि, तीरंदाजी, बॉक्सिंग और कुश्ती ने भारतीय दल की लाज बचाने का काम किया। अंतिम दो दिनों में ही भारत ने कुल 11 स्वर्ण पदक जीते।

टीम खेलों में भारत का कमाल
भारत ने टीम खेलों में अपना दबदबा कायम किया। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी की पुरुष एवं महिला टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। हॉकी में पहली बार पुरुष और महिला दोनों टीमों ने एक साथ स्वर्ण पदक जीते। पुरुष हॉकी टीम ने एशियाड में पहली बार अपने स्वर्ण पदक का बचाव किया। अच्छी बात यह रही कि हॉकी की दोनों टीमों ने स्वर्ण जीतने के साथ 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक का कोटा भी हासिल किया।
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नए सितारों ने जगाई बड़ी उम्मीद
इस एशियाड में कई खिलाड़ियों ने पहली बार इतिहास रचा। कुमकुम मोहोद, प्रणवी उर्स, नीरू ढांढा, परवीन हुड्डा और अमन सहरावत जैसे खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई। जिंदगी के संघर्ष से उबरकर स्वर्ण जीतने वाली महिला बॉक्सर परवीन हुड्डा भावुक हो गईं। जीत के बाद पहले उनकी आंखों से आंसू निकले और फिर वह अपने करीबियों से गले लग गईं।

इन खिलाड़ियों ने रचा इतिहास, जीते पहले पदक
  • कमलजीत-सुरूचि इंदर सिंह : 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में पहली बार स्वर्ण।
  • काइनन चेनाई-नीरू ढांढा : ट्रैप मिश्रित टीम में पहली बार स्वर्ण।
  • अंकिता भकत, कुमकुम मोहोद और कीर्ति : रिकर्व तीरंदाजी महिला टीम में पहली बार स्वर्ण।
  • लवलीना बोरगोहेन : 75 किलो भार वर्ग में महिला मुक्केबाजी का पहला स्वर्ण।
  • कुमकुम मोहोद : रिकर्व तीरंदाजी महिला व्यक्तिगत में पहला स्वर्ण।
  • प्रणवी उर्स : गोल्फ महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में पहला स्वर्ण।
  • अमन सहरावत : कुश्ती पुरुष 57 किलो फ्रीस्टाइल में पहला स्वर्ण।
  • भारतीय पुरुष एवं महिला हॉकी टीमें : हॉकी में पहली बार डबल गोल्ड फिनिश।
  • नीरू ढांढा : महिला ट्रैप व्यक्तिगत में पहली बार स्वर्ण।

पहली बार रजत पदक भी आए
  • अनाहत सिंह : स्क्वैश महिला एकल में पहला रजत।
  • रोशिबिना देवी : वुशु महिला सांडा 60 किलो में पहला रजत।
  • धीरज-कुमकुम मोहोद : तीरंदाजी रिकर्व मिश्रित टीम में पहला रजत।
  • अंतिम पंघाल : कुश्ती महिला 53 किलो में पहला रजत।
  • नीरू ढांढा : शूटिंग महिला ट्रैप टीम में पहला रजत।

कई खेलों में पहली बार पदक
भारत के लिए सुचिका तरियाल ने एमएमए में पहली बार कांस्य पदक दिलाया। जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस पुरुष एकल में पहला पदक जीता। महेश्वरी चौहान, परिनाज धालीवाल और राइजा ढिल्लों ने महिला स्कीट में पहला पदक दिलाया। परिनाज धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका ने स्कीट मिश्रित टीम में पहला पदक जीता। सतनाम सिंह और सलमान खान ने रोइंग पुरुष डबल स्कल्स में पहला पदक दिलाया। बारानिका एलंगोवन ने एथलेटिक्स महिला पोल वॉल्ट में पहला पदक जीता। नेत्रा कुमानन ने सेलिंग महिला डिंगी में पहला पदक दिलाया। सेपकटाकरा में भी पुरुष क्वाड्रेंट में भारत ने पहली बार पदक जीता।

टेनिस और घुड़सवारी खाली हाथ
कुछ खेलों में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पिछली बार दो पदक जीतने वाला टेनिस इस बार खाली हाथ लौटा। घुड़सवारी में पिछली बार स्वर्ण समेत दो पदक आए थे, लेकिन इस बार कोई पदक नहीं मिला। बैडमिंटन में भी भारत को इस बार सिर्फ टीम कांस्य पदक मिला। रोइंग में पिछली बार पांच पदक मिले थे, जबकि इस बार सिर्फ एक कांस्य पदक आया।

एथलेटिक्स और शूटिंग ने किया निराश
एथलेटिक्स में भारत को इस बार 24 पदक मिले, लेकिन स्वर्ण सिर्फ महिलाओं की 4x400 मीटर रिले से आया। पिछली बार जीते छह स्वर्ण पदकों को बचाने में भारत सफल नहीं रहा। दो बार के स्वर्ण विजेता शॉटपुटर तजिंदर पाल सिंह तूर को इस बार रजत से संतोष करना पड़ा। अनफिट अविनाश साबले स्टीपलचेज में चौथे स्थान पर रहे। ज्योति याराजी और प्रवीण चित्रवेल भी पूरी तरह फिट नहीं थे, इसके बावजूद एशियाड में उतरे।

देसी कोच के दम पर तीरंदाजी में कमाल
तीरंदाजी भारत के लिए इस एशियाड की बड़ी उपलब्धियों में रही। भारतीय तीरंदाजों ने पांच स्वर्ण समेत कुल नौ पदक जीते। 17 साल की कुमकुम मोहोद ने रिकर्व में टीम और व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने के साथ ओलंपिक कोटा भी हासिल किया। रिकर्व टीम ने विदेशी कोच के बजाय देसी कोच उधम सिंह और सोनम भूटिया के मार्गदर्शन में कोरिया और चीन को हराकर अपनी ताकत दिखाई। वहीं, कंपाउंड तीरंदाजी में जीवनजोत सिंह लंबे समय से टीम के साथ हैं और अमेरिकी कोच डेव कजिंस को टीम से जुड़े अभी कुछ ही दिन हुए हैं।

ओलंपिक के लिए रहना होगा सावधान
भारतीय दल ने एशियाई खेलों में चौथा स्थान जरूर बरकरार रखा है, लेकिन 2028 के ओलंपिक को देखते हुए प्रदर्शन में सुधार की जरूरत साफ नजर आती है। ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए भारत को उन खेलों पर विशेष ध्यान देना होगा, जहां इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हुआ। 85 पदकों में नए सितारों की चमक जरूर है, लेकिन 106 से 85 तक का सफर यह भी बताता है कि पुराने गढ़ों को फिर मजबूत करना होगा।
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