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अंकुश पंघाल की कहानी: कम उम्र, बड़े सपने और रिंग में दम; 21 वर्षीय मुक्केबाज ने स्वर्ण जीतकर बढ़ाया देश का मान

Fri, 02 Oct 2026 03:47 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया

सार

हरियाणा के 21 वर्षीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 80 किग्रा भारवर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने फाइनल में दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी गोल्ड जीत चुके अंकुश ने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में रजत पदक हासिल किया था। एशियाड का यह स्वर्ण उनके तेजी से उभरते अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है।
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अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
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विस्तार
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भारत के युवा मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 80 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया है। फाइनल में अंकुश ने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराकर भारत के खाते में एक और गोल्ड जोड़ा। यह एशियन गेम्स में अंकुश का पहला पदक है और पुरुष मुक्केबाजी में भारत का इस संस्करण का तीसरा स्वर्ण पदक है। 
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अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
कौन हैं अंकुश पंघाल?
  • 13 अगस्त 2005 को हरियाणा के हिसार के बेरिया में जन्मे अंकुश पंघाल अभी 21 साल के हैं।
  • वह पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में मुक्केबाजी करते हैं।
  • कम उम्र में ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है।
  • अंकुश की खासियत उनकी तेज मूवमेंट, काउंटर अटैक और रिंग में परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति बदलने की क्षमता रही है।
  • उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में रजत पदक, 2026 में चेकिया के उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में स्वर्ण, इसके बाद ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण और अब एशियन गेम्स का गोल्ड शामिल है।

अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
2025 में पहली बड़ी पहचान
अंकुश ने 80 किग्रा वर्ग में 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में हिस्सा लिया था। नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें इंग्लैंड के ओलादेमिजी शिट्टू से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी क्षमता की झलक दे दी। इसके बाद अंकुश ने 2026 में अपने खेल में और निखार किया। जुलाई में उन्होंने चेकिया के उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
कॉमनवेल्थ गेम्स में भी किया कमाल
अंकुश के करियर में सबसे बड़ा मोड़ 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स रहा। ग्लासगो में उन्होंने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड के डाइमेजी शिट्टू से हुआ। फाइनल की शुरुआत अंकुश के लिए अच्छी नहीं रही। वह पहले राउंड में 0-5 से पिछड़ गए, लेकिन उन्होंने मुकाबले में वापसी करते हुए अगले दोनों राउंड अपने नाम किए और 4-1 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वह ग्लासगो में 80 किग्रा वर्ग के कॉमनवेल्थ चैंपियन बने। यही प्रदर्शन उनके एशियन गेम्स अभियान की मजबूत नींव बना।

अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
एशियन गेम्स में ऐसे बढ़ते गए आगे
  • अंकुश ने एशियन गेम्स 2026 में भी शुरुआत से अपना दबदबा कायम रखा।
  • क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ताजिकिस्तान के नेकर्ज सलिमोव को 5-0 से हराया और भारत के लिए मुक्केबाजी में पदक पक्का किया।  
  • इसके बाद सेमीफाइनल में उनके सामने उज्बेकिस्तान के फजलीद्दीन एरकिनबोएव थे, जो 75 किग्रा वर्ग के मौजूदा विश्व चैंपियन रहे हैं।
  • अंकुश शुरुआती राउंड में पीछे रहने के बावजूद मुकाबले में लौटे और 4-1 से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। 
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अंकुश पंघाल - फोटो : IANS
फाइनल में दक्षिण कोरियाई मुक्केबाज को हराया
स्वर्ण पदक के मुकाबले में अंकुश के सामने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग थे। अंकुश ने पूरे मुकाबले में संयम के साथ बॉक्सिंग की और काउंटर पंचिंग, फुटवर्क तथा मूवमेंट के जरिए मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। अंत में उन्होंने 4-0 के फैसले से किम मिनसियोंग को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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