ब्रिटेन के महान टेनिस खिलाड़ी एंडी मरे ने अपने रिटायरमेंट के बाद के कोचिंग अनुभव को लेकर खुलकर बात की है। मरे ने साफ किया कि वह भविष्य में फिर से कोचिंग करना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं हैं।
मरे, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद कुछ समय के लिए नोवाक जोकोविच के साथ काम किया, ने इस अनुभव को सीखने वाला बताया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'जोकोविच ने शायद मुझसे कुछ नहीं सीखा, लेकिन मैंने बहुत कुछ सीखा। मैं दोबारा कोचिंग करना चाहूंगा, लेकिन अभी नहीं।'
कोचिंग अनुभव से मिली नई सीख
मरे ने बताया कि एक खिलाड़ी से कोच बनने का सफर काफी अलग होता है। उन्होंने कहा कि जोकोविच के साथ काम करने के दौरान उन्हें उनके खेल और रोजमर्रा की तैयारी को करीब से समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा, 'मैं उनके खेल के बारे में पहले से काफी जानता था, क्योंकि वर्षों तक उनके खिलाफ खेला हूं। लेकिन कोच के तौर पर उनकी दिनचर्या को देखना एक अलग अनुभव था।'
कम्युनिकेशन है सबसे बड़ा हथियार
मरे ने यह भी स्वीकार किया कि कोचिंग में सबसे अहम चीज खिलाड़ी के साथ संवाद और समझ है। उन्होंने बताया कि एक पिता होने के नाते उनकी सोच में बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'कोचिंग में यह जरूरी है कि आप अपने खिलाड़ी को समझें और उसकी बात सुनें। मुझे लगता है कि बच्चों के साथ समय बिताने से मैं ज्यादा समझदार बना हूं।'
टीम का हिस्सा बनने का अनुभव
मरे ने कहा कि जब आप खिलाड़ी होते हैं तो पूरी टीम आपके लिए काम करती है, लेकिन कोच के तौर पर आप टीम का एक छोटा हिस्सा होते हैं। उन्होंने समझाया, 'कोचिंग में आप टीम के साथ मिलकर काम करते हैं, जहां आपका मकसद एक खिलाड़ी को बेहतर बनाना होता है।' मरे ने नोवाक जोकोविच का समर्थन करते हुए कहा कि वह 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने की क्षमता रखते हैं।
बिना पछतावे लिया संन्यास
अपने करियर को लेकर मरे ने कहा कि उन्होंने टेनिस सिर्फ नतीजों के लिए नहीं, बल्कि अपने जुनून के लिए खेला। उन्होंने कहा, 'मैं चार-पांच साल पहले भी रिटायर हो सकता था, लेकिन मैंने खेलना जारी रखा क्योंकि मुझे टेनिस से प्यार था।' मरे ने यह भी कहा कि उन्होंने सही समय पर संन्यास लिया और अब उन्हें कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं खुश हूं कि मैंने अपने मन से खेल को छोड़ा। अब मेरे पास परिवार के साथ बिताने के लिए समय है।'