बचपन में व्हीलचेयर पर रहे, फिर बने विश्वस्तरीय पहलवान
21 जुलाई 1985 को हरियाणा के रोहतक जिले के मदीना गांव में जन्मे संग्राम सिंह का शुरुआती जीवन बेहद कठिन रहा। बचपन में उन्हें रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी हो गई थी, जिसके कारण जीवन के शुरुआती आठ साल उन्होंने व्हीलचेयर पर बिताए। डॉक्टरों ने सामान्य जीवन की उम्मीद तक छोड़ दी थी, लेकिन संग्राम ने हार नहीं मानी। उनके पिता उमेद सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं, जबकि मां रामोदेवी गृहिणी हैं। परिवार के सहयोग और अपने अदम्य साहस के दम पर संग्राम ने बीमारी को मात दी और खेलों की दुनिया में कदम रखा।
दिल्ली पुलिस से शुरू हुआ सफर
संग्राम सिंह ने 1999 में दिल्ली पुलिस के साथ एक खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 2005 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल रेसलिंग की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
दक्षिण अफ्रीका में बना 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर'
साल 2012 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित मुकाबले के बाद वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफेशनल्स (डब्ल्यूडब्ल्यूपी) ने संग्राम सिंह को 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर' के खिताब से सम्मानित किया। उनकी फिटनेस, स्टैमिना और रेसलिंग स्टाइल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद जुलाई 2015 में पोर्ट एलिजाबेथ में हुए 'लास्ट मैन स्टैंडिंग फाइट' में उन्होंने जो ई. लेजेंड को हराकर डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप अपने नाम की। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में बुलाकर उन्हें बधाई दी थी। संग्राम ने 27 मार्च 2016 को दक्षिण अफ्रीका के ही पोर्ट एलिजाबेथ में दक्षिण अफ्रीकी रेसलर अनांजी को हराकर दूसरी बार डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप जीती और खिताब भारत के नाम बरकरार रखा।