अमर उजाला संवाद में भारत की स्टार शटलर और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल पहुंचीं। उन्होंने कई मुद्दों पर बातचीत की। साइना ने युवाओं को दबाव को झेलने और उससे निपटने का मंत्र दिया है। साइना ने कहा कि अगर आप दबाव नहीं झेल सकते तो आप खिलाड़ी नहीं हैं। इसके अलावा खेल को अपना करियर चुन रहीं लड़कियों को लेकर भी बातचीत की।
आइए जानते हैं इस स्टार शटलर ने क्या कहा...
यह पूछे जाने पर कि '2012 में आपने कांस्य जीता था। क्या आप भी दबाव में थीं?' इसके जवाब में साइना ने कहा- अगर आप दबाव को नहीं झेल पाते हैं तो आप खिलाड़ी नहीं हैं। आप हमेशा यह सोचते हैं कि आपका विपक्षी कौन है। आपको किसे हराना है। कौन खिलाड़ी लगातार आपको हरा रहा है। आपको प्रैक्टिस के दौरान भी दबाव झेलना पड़ता है। आपको प्रैक्टिस के समय भी यह सोचना पड़ता है कि कैसे तैयारी करनी है। आपने जितनी अच्छी ट्रेनिंग की है उतना ही अच्छा परिणाम आएगा। आप अगर मुख्य मैच में दबाव में आ जाते हैं तो उससे अच्छा है कि खेल को छोड़कर पढ़ाई कर लें।'
स्टार शटलर ने कहा- आप जोकोविच या रोजर फेडरर को देखिए। उन्हें सब फॉलो करते हैं। आप अगर बहुत तैयारी के बाद मैच में अच्छा नहीं खेलते हैं तो मुश्किल होगी।आपके दिमाग में यह होना चाहिए कि दबाव में नहीं आना चाहिए। आपको अपने माता-पिता के बारे में सोचना चाहिए। जब आप परीक्षा में बैठते हैं उसी तरह का दबाव मैच की शुरुआत में रहता है। जोकोविच भी ऐसा ही कहते हैं कि शुरुआती समय में काफी दबाव होता है, लेकिन आपको विपक्षी और नतीजों पर ध्यान देना चाहिए। इससे मुझे हमेशा ओलंपिक या कई टूर्नामेंट में मदद मिली। विश्व की नंबर-1 खिलाड़ी बनना आसान नहीं है। मुझे हमेशा विश्वास रहा है कि मैंने अच्छी ट्रेनिंग की है और फिटनेस पर ध्यान दिया है तो नतीजे आएंगे।
यह पूछे जाने पर 'बहुत सारी लड़कियां स्पोर्ट्स में जाना चाहती है। आज की पीढ़ी जल्दी हार भी मान जाती है। उनके लिए क्या कहेंगी?' साइना ने जवाब देते हुए कहा- आज का समय पहले से ज्यादा आसान हो गया है। सबकुछ उपलब्ध है। कोच हैं, एकेडमी हैं और सुविधाएं हैं। खेल बहुत शारीरिक क्षमता मांगता है। इसके लिए सबको तैयार रहना होगा। आज लड़के और लड़कियां काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। आपको बेस्ट रैकेट और बेस्ट जूते लेने से कुछ नहीं होगा। आपको हफ्ते के छह दिन 12 घंटे प्रैक्टिस करनी होगी। इसके लिए तैयार रहना होगा। इन चुनौतियों को दिमाग में डालना होगा। बस एक ही चुनौती है कि आप शरीर को तोड़ने के लिए तैयार हैं या नहीं। यही है चैंपियन बनने का मॉडल पेपर।
ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली शटलर हैं साइना नेहवाल
साइना नेहवाल ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इस स्टार शटलर ने अपने करियर की शुरुआत बहुत पहले ही कर दी थी। उन्होंने 2008 में BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीती थी। उसी साल उन्होंने पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी किया था, लेकिन लंदन 2012 में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया भर में प्रसिद्धि हासिल की। उनके पति पी कश्यप भी बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके हैं।
2008 में बीजिंग में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों मे भी वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। साइना भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। इस पूर्व नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपने करियर में कई मेडल जीते। वह विश्व चैंपियनशिप में एक रजत और एक कांस्य, राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य और एशियाई खेलों में दो कांस्य जीत चुकी हैं।