अमर उजाला संवाद-पंजाब आज चंडीगढ़ के होटल हयात रेजेंसी में हो रहा है। कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा, खेल, कृषि, सिनेमा और कला क्षेत्र के माहिर जुटे हैं। इस दौरान कार्यक्रम के 'जिद्द और जुनून' सत्र में खेल के कुछ धुरंधर पहुंचे। भारतीय महिला हॉकी टीम की ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर ने हॉकी और खेल के कई पहलुओं पर बातचीत की।
गुरजीत से सवाल: एक महिला होते हुए हॉकी खेलना कितना मुश्किल है?
जवाब: मेरे लिए यह चीज आसान नहीं थी। मैं एक बॉर्डर के नजदीक गांव से आती हूं। वहां लड़कियों की शादी जल्दी होती है। इस कारण पापा ने मुझे हॉस्टल में रखने का फैसला किया। हमने हॉस्टल में देखा कि लड़कियां अलग-अलग खेलों को आजमा रही हैं तो मैंने पिता जी से इसके बारे में पूछा। उन्होंने खेलने की इजाजत दे दी।
गुरजीत से सवाल: कई और खेल थे, जिसमें आप जा सकती थीं, लेकिन हॉकी ही क्यों?
जवाब: हॉकी के बारे में बिल्कुल पता नहीं था। एक हफ्ते तक मैंने इसे देखा। यह मुझे काफी मजेदार खेल लगा। हॉकी में काफी एक्टिविटी रहती है और खेलने में मजा भी आता है। वहीं से मैंने हॉकी को अपनाया।
गुरजीत से सवाल: 2018 एशिया कप में आपने आठ गोल किए। उस टूर्नामेंट के बारे में कुछ बताइए?
जवाब: वह मेरा पहला एशिया कप था। मैं हमेशा गोल करने के बारे में सोचती थी। जब एशिया कप चल रहा था तो कोच हमें सबकुछ बताते थे। मुझे कभी भी डर नहीं लगा कि मैं गोल नहीं कर सकती थी। मैं हर एंगल से गोल करती थी। मैं बिना कुछ सोचे हुए अपनी क्षमता से गोल करती थी।
गुरजीत से सवाल: ड्रैग-फ्लिकिंग के बारे में दर्शकों को आम भाषा में बताइए?
जवाब: ड्रैग फ्लिकिंग एक नॉर्मल पुश ही है। इसे अलग-अलग तरीकों से मारा जाता है। नॉर्मल पुश को मारने के लिए हम ग्राउंड का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ड्रैग फ्लिक के लिए हमें अतिरिक्त मेहनत करनी होती है। यह अतिरिक्त क्षमता है जो सबके अंदर नहीं होती। इसके लिए फुटवर्क पर ज्यादा काम करना होता है। सही एंगल और टाइमिंग की भी आवश्यकता होती है। स्टेप को लेकर ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है। मैं खुश हूं कि मुझे लोग ड्रैग फ्लिकर के रूप में पहचानते हैं।
गुरजीत से सवाल: अभी आप रुपिंदर पाल से ड्रैग फ्लिक के बारे में सीख रही हैं। उनके साथ कैसा अनुभव रहा?
जवाब: कैंप में अभी दो सेशन में रुपिंदर आए हैं। उनसे काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने भारत के लिए कई गोल किए हैं। वह सिखाते हैं तो काफी अच्छा लगता है। हमें अपनी गलतियों के बारे में पता नहीं रहता है। वह आगे भी हमें सिखाते रहेंगे।
गुरजीत से सवाल: भारत की बहुत सारी लड़कियां खेलों में जाना चाहती हैं। कई लड़कियां हॉकी खेलना चाहती है, लेकिन वह भविष्य को लेकर डरती हैं। हाल ही में पंजाब सरकार ने खेलने वाली लड़कियों को नौकरी देने का फैसला किया है। इसमें कोई परीक्षा नहीं होगी। इस घोषणा से कितने खिलाड़ियों को लाभ होगा। साथ ही आप पंजाब सरकार से किन क्षेत्रों में ज्यादा काम की गुजारिश करेंगी?
जवाब: पंजाब सरकार खेलों को लेकर अच्छा काम कर रही है। अभी कुछ चीजों और ज्यादा अच्छी हो सकती है। जो बच्चे सिर्फ खेलते हैं उनके लिए भी कुछ अवसर होने चाहिए। सरकार को हॉस्टल, कोच, ग्राउंड्स को लेकर और ज्यादा काम करना चाहिए। इससे ज्यादा से ज्यादा लड़कियां आगे बढ़ेंगी।
गुरजीत से सवाल: गावों से बच्चों को खेलों में आगे लाने के लिए क्या करना चाहिए? क्या आपको लगता है कि इसके लिए सर्वे की आवश्यकता है? इसके लिए अलग से काम करने की आवश्यकता है?
जवाब: हम पहले देखते थे कि जिला स्तर, राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबले होते थे अब इनमें कुछ न कुछ कमी आ रही है। इस कमी के कारण गांव के बच्चे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। छोटे स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के ज्यादा टूर्नामेंट होने चाहिए। खिलाड़ियों के लिए सारी सुविधाएं होनी चाहिए। हॉस्टल, भोजन से लेकर अन्य सुविधाओं पर देना चाहिए। ऐसे में कोच भी खिलाड़ियों को ज्यादा मदद कर पाएंगे।
गुरजीत से सवाल: अच्छी यादों को सबलोग याद करते हैं, लेकिन बुरे दिनों को भूल जाती है। क्या आपके करियर में कभी ऐसा कोई वक्त आया तब आपको लगा कि अब आप नहीं खेल पाएंगी?
जवाब: सभी खिलाड़ियों के जीवन में ऐसा समय आता है। मेरी छोटी मां राष्ट्रमंडल खेलों के समय बीमार थीं। उन्होंने मुझे उस समय कहा था कि अपने लक्ष्य पर ध्यान दो। काम पूरा करके ही घर आना।