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वेंटिलेटर’ पर हैं संस्कृति से जुड़े 287 खेल, 'मेडल के बजाय देसी घी': एके सक्सेना

Fri, 28 Sep 2018 05:29 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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ओलंपिक गेम एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव एके सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
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हरदोईः स्पोर्ट्स स्टेडियम में चल रही 27 वीं स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता का लखनऊ से निरीक्षण करने पहुंचे नान ओलंपिक गेम एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव एके सक्सेना ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि सरकारों की अनदेखी के चलते भारत के 287 और प्रदेश के 70 से अधिक खेलों को नान ओलंपिक गेम एसोसिएशन 10 प्रांतों में सीमित संसाधनों के बावजूद जिंदा रखे हुए है। सरकारों की नजरें इनायत हो जाएं तो माटी से जुड़े खेलों का अस्तित्व बच सकता है।
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एके सक्सेना के मुताबिक कंचा व पतंगबाजी देश की गली कूचों के खेल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका आदि में इसकी फेडरेशन है। यह खेल अब उनके यहां के जाने जाते हैं। देश में यह खेल पहचान के मोहताज हैं। उन्होंने बताया कि रस्साकसी को ओलंपिक में 10 साल पहले शामिल किया गया। दो साल पहले फिर बाहर कर दिया गया। ऐसे ही 287 खेलों के लिए एसोसिएशन सरकार से लड़ाई लड़ रही है। खासतौर से 36 परंपरागत खेलों को ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए मशक्कत की जा रही है। उन्होंने बताया कि डेफ्ट क्रिकेट का जो गूंगे बहरे खिलाड़ियों के लिए है, एसोसिएशन ने  2014 में अपने खर्चे पर लखनऊ में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन कराया। वर्ष 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आस्ट्रेलिया में आयोजन कराने की तैयारी चल रही है। उन्होंने स्ट्रैंथ लिफ्टिंग के बारे में बताया कि इस खेल को ओलंपिक में शामिल कराने की तैयारी जोर शोर से चल रही है। पूरे देश के स्ट्रैंथ खिलाड़ियों को जल्द ही इसके मान्य होने का तोहफा मिलेगा। 

मेडल व शील्ड के बजाय देसी घी औेर कपड़े
महासचिव एके सक्सेना ने बताया कि एसोसिएशन अपने खर्चों पर गांवों व कस्बों में जाकर डिस्ट्रिक, स्टेट व नेशनल स्तर के खेलों के आयोजन करा रही है।  उन्होंने बताया कि फसल काटने के दौरान 10 मजदूरों को इकट्ठा कर वह खेल करा रहे हैं। इन्हें मजदूरी भी दे रहे हैं। इनमें कम समय में उतनी ही फसल काटने के लिए खेल भावना जागृत की जा रही है। महिलाएं गांव में कुएं से पानी निकालती हैं। इसी को खेल बना दिया। कम समय में ज्यादा बाल्टी पानी निकालने वाली महिला को पुरस्कृत किया जाता है। इसके अलावा बैलगाड़ी, गुल्ली डंडा सहित कई खेल कराए जा रहे हैं। अभी 10 प्रदेशों में यह खेल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे खेलों में शील्ड व मेडल देने के बजाए जरूरतों के हिसाब से विजेताओं को देशी घी, कपड़े व  शाल दी जाती है।
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2020 में झांसी में होंगे राष्ट्रीय स्तर के नान ओलंपिक खेल
नान ओलंपिक खेल 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर कराने की तैयारी चल रही है। सभी प्रांतों के एसोसिएशन पदाधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया है। इस आयोजन में बैलगाड़ी दौड़, कंचा, गुल्ली डंडा, डेफ्ट क्रिकेट आदि सहित सभी नान ओलंपिक खेलों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में हो रहे स्ट्रैंथ लिफ्टिंग  प्रतियोगिता के भव्य प्रदर्शन को खेल मंत्री सहित प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इसे मान्य करने की कोशिश और तेज की जाएगी।
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