एमेच्योर इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (आईबा) ने एमेच्योर इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन (एआईबीएफ) के लिए और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। आईबा अध्यक्ष डॉ. चिंग कू वू ने येरेवान (आर्मेनिया) में प्रतिबंधित एआईबीएफ के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट पीके मुरलीधरन राजा को साफ कर दिया है कि फेडरेशन के संविधान में संशोधन कर नए सिरे से चुनाव कराए जाएं। डॉ. वू का का कहना है कि संशोधन आईबा संविधान के मुताबिक होना चाहिए। अगर संविधान में संशोधन होता है तो चेयरमैन अभय सिंह चौटाला के रास्ते एआईबीएफ में बंद होने की पूरी उम्मीद है।
येरेवान में चल रही वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप के दौरान मुरलीधरन राजा ने डॉ. वू से प्रतिबंध के बारे में बात की। मुरली ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने आईबा अध्यक्ष को सारी स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि चुनाव सेवानिवृत चीफ जस्टिस की अगुवाई में कराए गए हैं। डॉ. वू ने कहा कि एआईबीएफ के संविधान में संशोधन की जरूरत है। राजा का कहना है कि फेडरेशन में इस बारे में मंत्रणा शुरू हो गई है। जल्द ही इस बारे में जनरल हाउस की बैठक बुलाई जा सकती है।
डॉ. वू ने यह भी आश्वासन दिया है कि चुनाव होते ही और आईओसी का आईओए पर प्रतिबंध हटने पर एआईबीएफ से भी प्रतिबंध हटा लिया जाएगा। मुश्किल यह है कि आईबा के संविधान में साफ लिखा है कि अध्यक्ष पद पर तीन टर्म से ज्यादा उम्मीदवारी नहीं जताई जा सकती है। जबकि चेयरमैन पद का भी कोई प्रावधान नहीं है। चौटाला फेडरेशन में अध्यक्ष पद पर तीन टर्म पूरे कर चुके हैं। साथ ही वह फेडरेशन के संविधान में संशोधन कराकर हाल ही में चेयरमैन बने हैं। हालांकि चौटाला साफ कर चुके हैं कि वह चेयरमैन पद छोड़ने को तैयार हैं।
बॉक्सर नहीं सभी खिलाड़ी होंगे प्रभावित
आईओसी की ओर से आईओए व आईबा की ओर से एआईबीएफ को प्रतिबंधित करने पर सिर्फ बॉक्सर को ही नहीं बल्कि सभी भारतीय खिलाड़ियों को नुकसान उठाना होगा। आईओसी के प्रतिबंध के चलते किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों को उसके संबंधित इंटरनेशनल फेडरेशन के झंडे तले भागीदारी करनी होगी। साथ ही प्रतिबंध के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के आमंत्रण भी मिलने बंद हो सकते हैं। लंदन ओलंपिक में चेफ डि मिशन रहे मुरलीधरन राजा स्वीकार करते हैं कि प्रतिबंध का खामियाजा देश के सभी खेलों के खिलाड़ियों को भुगतना पड़ेगा।