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Ajit Singh Yadav: अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद अजीत यादव के हौसले बुलंद, बोले- अब स्वर्ण जीतूंगा

Sun, 19 Jan 2025 05:04 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अजीत ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने पर खुशी जताई। 31 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा- 'इस पुरस्कार ने मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया है। मैंने पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक के लक्ष्य के साथ गया था लेकिन  लगभग आधा मीटर से मैं शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गया।
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अजीत सिंह यादव - फोटो : ANI
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विस्तार
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पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वाले पैरा भाला फेंक खिलाड़ी अजीत सिंह यादव ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में एक हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी अपना हौसला कम नहीं होने दिया। अजीत ने 2017 में ट्रेन दुर्घटना में अपना बायां हाथ गंवा दिया था। उन्होंने पेरिस पैरालंपिक में 65.62 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक क्यूबा के गुइलेर्मो वरोना ने 66.14 मीटर के प्रयास के साथ जीता था। 
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अजीत ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने पर खुशी जताई। 31 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा- 'इस पुरस्कार ने मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया है। मैंने पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक के लक्ष्य के साथ गया था लेकिन  लगभग आधा मीटर से मैं शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गया। इस कसर को मैं लॉस एंजिलिस में पूरा करना चाहूंगा।' 

अजीत 2017 में एक दोस्त को बचाने की कोशिश में ट्रेन दुर्घटना का शिकार होकर अपना एक हाथ गंवा बैठे थे। उन्होंने कहा- 'अपने दोस्त को बचाने की कोशिश में मेरा एक हाथ ट्रेन की पटरी पर आ गया और उसके ऊपर से जब ट्रेन गुजरी तो मुझे लगा की मेरा जीवन ही समाप्त हो गया। यह भयावह मंजर अब भी मेरे सपने में आता है।' 
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उन्होंने आगे कहा- 'अस्पताल में इलाज के बाद जब घर आया तो मुझे लगा कि जब इस चुनौती का सामना करने में सफल रहा तो फिर हिम्मत नहीं हारनी चाहिये। हाथ ही तो गंवाया है, हौसला तो पूरी तरह से बरकरार है।' खेलों से जुड़ने के बारे में पूछे जाने पर विश्व पैरा चैम्पियनशिप के इस स्वर्ण पदक विजेता (पेरिस 2023) ने कहा कि वह खेलों से पहले से जुड़े रहे हैं लेकिन दुर्घटना से पहले वह शिक्षक बनना चाहते थे। 

उन्होंने कहा- 'मैं पहले से खेलों से जुड़ा रहा हूं। मैंने शारीरिक शिक्षा में स्नातक और स्नातकोत्तर करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) पास कर पी.एचडी(डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) किया है। मेरे कॉलेज के एक प्रोफेसर पैरालंपिक से जुड़े थे और उनकी सलाह पर ही मैंने भाला फेंक में हाथ आजमाना शुरू किया।' टोक्यो ओलंपिक (2021) में मामूली अंतर से पदक से चूकने वाले इस खिलाड़ी ने कहा- 'मुझे शिक्षक बनना था लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।' 

अजीत का मानना है कि मौत से जंग जीतने के बाद उनकी सफलता ने यह साबित किया कि हिम्मत और हौसला रख कर किसी भी चुनौती से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा- 'मेरी सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी कारण से अवसाद में चले जाते हैं। अगर मैं इस भयावह मंजर से निकलने में सफल रहा तो कोई भी कुछ भी कर सकता है।'
 
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