भारत के दिग्गज निशानेबाज और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में हासिल किए अपने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक को याद किया है। उन्होंने 18 साल पहले मिली उस उपलब्धि को अपने खेल जीवन की 'सबसे बड़ी ऊंचाई' बताया। 11 अगस्त 2008 को बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में 700.5 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता था। इसके साथ ही वह ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे।
'मेरे खेल जीवन की सबसे बड़ी ऊंचाई'
अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन की 18वीं वर्षगांठ पर बिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '18 साल पहले आज ही के दिन मैं अपने खेल जीवन की सबसे बड़ी ऊंचाई पर पहुंचा था। जिंदगी ने तब से मुझे सिखाया है कि चोटियों के बीच की जगह भी उतनी ही मायने रखती है।' बिंद्रा का यह स्वर्ण पदक भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल है। बीजिंग में स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने 2012 और 2016 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह क्रमश: 16वें और चौथे स्थान पर रहे।
दो दशक के करियर में 150 से ज्यादा व्यक्तिगत पदक
- अभिनव बिंद्रा ने अपने करीब दो दशक लंबे शानदार करियर में 150 से अधिक व्यक्तिगत पदक जीते।
- वह सात बार के राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता हैं, जिसमें चार स्वर्ण पदक शामिल हैं।
- इसके अलावा उन्होंने एशियाई खेलों में तीन पदक जीते, जिसमें एक रजत पदक शामिल है।
- 2006 में बिंद्रा ने विश्व चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया था।
- 2010 में नई दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में स्वर्ण और व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
खेलों में योगदान के लिए मिला बड़ा सम्मान
- खेल से संन्यास लेने के बाद भी बिंद्रा भारतीय खेलों से जुड़े रहे। उन्होंने अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट (एबीएफटी) की स्थापना की, जो भारत में जमीनी स्तर के खिलाड़ियों को आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस तकनीक और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता है।
- बिंद्रा ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के एथलीट्स कमीशन के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया और इस साल की शुरुआत में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ।
- आईओसी में अपने कार्यकाल के दौरान वह ओलंपिक ऑर्डर से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय बने।
- यह सम्मान ओलंपिक आंदोलन में उनके योगदान के लिए दिया गया।
- अभिनव बिंद्रा का बीजिंग ओलंपिक स्वर्ण आज भी भारतीय खेल इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है और उनकी उपलब्धि ने देश में निशानेबाजी को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।