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गर्भावस्था में फायदेमंद हैं ये आसन

Tue, 27 Nov 2012 05:21 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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गर्भावस्था के दौरान अक्सर महिलाओं के स्वास्थ्य में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। खासतौर पर कमर और पीठ में दर्द, नस चढ़ना, मानसिक अशांति आदि। इनसे छुटकारे के लिए महिलाएं न तो बहुत अधिक दवा ले सकती हैं और न ही ज्यादा वर्कआउट कर सकती हैं।
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ऐसे में इन समस्याओं से छुटकारे के लिए कुछ योगासन ऐसे हैं जिन्हें करने के लिए उन्हें अधिक मेहनत भी नहीं करनी होगी और गर्भावस्था के दौरान ये पूरी तरह सुरक्षित भी हैं। इनसे गर्भावस्था के समय होने वाली छोटी-छोटी समस्याओं से निपटने में आसानी भी होगी। किसी भी आसन को करने से पहले अपने डाक्टर से सलाह अवश्य लें।

तितली आसन
गर्भावस्था के दौरान यह आसन करने से दर्द कम होता है। गर्भवती महिलाएं तीसरे महीने से इस आसन को शुरू कर सकती हैं। इससे शरीर के निचले हिस्से का तनाव खुलता है और शरीर का लचीलापन बढ़ जाता है। इससे प्रजनन के दौरान गर्भवती महिला को दिक्कत कम होती है।
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इसे करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर मोड़कर तलवे सटा लें यानी पैरों से नमस्ते की मुद्रा बनाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को क्रॉस करते हुए पैर के पंजे पकड़ें और पैरों को ऊपर-नीचे करें। पीठ और बाजू बिल्कुल सीधे रखें। इस क्रिया को 15 से 20 से अधिक न करें। यदि इसे करते वक्त कमर के निचले हिस्से में दर्द हो तो इसे बिल्कुल न करें और पैरों को जोर से न हिलाएं।

पर्वतासन
गर्भावस्था में पर्वतासन करने से कमर दर्द कम होता है और आगे चलकर शरीर बेडौल नहीं होता। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासम ने आराम से बैठ जाएं। पीठ सीधी रखें। सांस भीतर लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ लें। कोहनी सीधी रखें। कुछ देर के लिए इस मुद्रा में रहें और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस आसन को दो या तीन से अधिक न दोहराएं।

वक्रासन
यह आसन रीढ़ की हड्डी, पैर और गर्दन का अच्छा व्यायाम है जिसे करते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि गर्भवती महिलाएं इसमें अधिक जोर न लगाएं। इसके लिए दोनों पैर सामने की ओर फैलाकर सीधा बैठ जाएं। उब सांस भीतर लेते हुए दोनों हाथों को कंधे की सीध में फैलाएं, हथेलियों का मुंह नीचे की ओर हो। अब सांस छोड़ते हुए कमर से ऊपर के भाग को जितना मोड़ सकें, उतना मोड़ें। अधिक स्ट्रेस न लें। फिर सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आएं। अब इस विधि को दूसरी दिशा में कमर मोड़ते हुए एक बार और दोहराएं और फिर सामान्य मुद्रा में आ जाएं।

अनुलोम-विलोम
गर्भावस्था में यह आसन करने से शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है और महिलाएं तनावरहित रहती हैं। इसके लिए सुखासन में पहले बैठ जाएं। फिर दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दाया छिद्र बंद करें और सांस भीतर की ओर खींचे। फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बाईं ओर का छिद्र बंद कर दें और अंगूठा हटाकर दाईं ओर से सांस छोड़ें। इसी प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएँ।

शवासन
गर्भावस्था में शवासन करने से न सिर्फ महिलाओं को मानसिक शांति मिलती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी अच्छी तरह होता है। इसके लिए बिस्तर पर सीधा लेट जाएं और अपने हाथ-पैर को खुला छोड़ दें। पूरी तरह तनावमुक्त हो जाएं और फिर धीरे-धीरे लंबी सांस ले और छोड़ें। 
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