अंधविश्वास और धार्मिक कट्टरता को अब तक किसी से कोई डर नहीं था, न तो विज्ञान से और न ही तर्कों से। लेकिन अब योग के बढ़ाते प्रभाव के कारण इन क्षेत्रों में खलबली मचने लगी है। आपको जान कर आश्चर्य होगा इन कोशिशों में न केवल धर्म धुरंधर बल्कि ज्योतिष और चिकित्सा विज्ञान के जानकार भी एक साथ हो रहे है।
योग के प्रभाव और वैज्ञानिक आधार को देखते हुए स्वामी सर्वानंद सरस्वती का कहना है कि इससे सभी धर्मों को खतरा होने लगा है। हिंदुओं में तो भाग्यवादी लोग और ज्योतिष के व्यापारी भी योग से भी ग्रहों-नक्षत्रों की बाधाएं दूर करने लगे हैं। एलोपैथिक समर्थक और कर्मकांडी कट्टर लोग तो हाथ धोकर पीछे पड़े हैं।
सिलवर स्ट्रीट चर्च के पादरी साइमन का कहना है कि योग गैर-ईसाई है। टॉन्टन स्थित सिल्वर स्ट्रीट बैपटिस्ट चर्च और सेंट जेम्स एंग्लिकन चर्च के पादरियों ने तो योग की कक्षाओं पर बहुत पहले ही प्रतिबंध की घोषणा कर रखी है। वहां के कुछ धर्मगुरुओं का कहना है कि योग से शरीर में शैतानी आत्माओं के प्रवेश का खतरा रहता है और योग गैर-ईसाई है।
ब्रिटेन में कैथोलिकों में शैतानी ताकतें भगाने वाले गुरु फादर जेरेमी जेविस के अनुसार, योग लोगों को नशे, आसुरी संगीत और नग्नता की ओर ले जाता है। यह विद्या युवाओं को बरबाद कर रही है। स्वामी सर्वानंद के अनुसार प्रयोगशालाओं में योग को ले कर कोई भ्रम नहीं है। यह विद्या प्रयोग और परीक्षण की कसौटी पर खरी उतरी है विरोध इसलिए है कि योग से उन तमाम लोगों की दुकानदारी खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है जो मनुष्य के दुःख पर निर्मित हैं।
यदि लोग बीमार न होंगे तो रोग बीमारियों के दम पर चलने वाले तमाम धंधे पिटने लगेंगे। यदि लोग दुःखी न होंगे तो उनमें ईश्वर के प्रति आस्था का ग्राफ भी गिरने लगेगा। ईश्वर को नहीं मानने वाले लोग संगठित धर्म को पोषित भी नहीं करेंगे तो ऐसे में धर्म का क्या होगा? इसलिए योग धार्मिक आडम्बर और थोथे आश्वासनों और दावों की कलाई धर्म अध्यात्म के दायरे में रह कर ही खोल रहा है। यह सुखद स्थिति है।