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बिना टॉनिक के ताकत और उर्जा पाने का आसान उपाय

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कोई भी औषध उपचार दिमाग को छह घंटे से ज्यादा सक्रिय नहीं रख सकते। शारीरिक श्रम करने वाले आठ घंटे तक सक्रिय रख सकते हैं। पर वह भी दिमाग के स्वस्थ रहने की स्थिति में।
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इस तरह सोलह घंटे ताकत पा सकते हैं

ज्यादा सोचना, पांच या ज्यादा से ज्यादा छह घंटे दिमागी मेहनत करना और तनाव में रहना मस्तिष्क के कमजोर होने और शरीर में तरह तरह की बीमीरियों का कारण हो सकता है।

लेकिन अभी ध्यान एक ऐसी विधि है जो मस्तिष्क की ऊर्जा को छह से ज्यादा घंटे तक जीवंत रख सकती है। अभ्यास के जरिए इसे सोलह घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। यह ऐसी कुंजी है जो मन को शांति प्रदान करती है।

24 मिनट में मिलती भरपूर ताकत

बर्कले स्थित कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में हुई एक रिसर्च के अनुसार उत्तेजनापूर्ण वातावरण में रहने वाले लोगों की मस्तिष्क संरचना अधिक सघन और जटिल होती है।

शोघ दौरान कुछ लोगों पर प्रयोग किए गए। तनाव में रहने और उस कारण दिमागी मेहनत नहीं कर पाने वालों की मस्तिष्कीय कोशिकाओं को उन स्नायुओं से सघन रूप में जुड़े पाया गया जिनसे उन्हें पोषण मिलता था। सक्रिय रहने की स्थिति में मस्तिष्क की कोशिका में केवल बढ़ोतरी ही नहीं होती, बल्कि आवश्यक ऊर्जा लाने वाला रक्त-प्रवाह भी बढ़ता है।

मस्तिष्क का यह सामर्थ्य कम से कम चौबीस मिनट ध्यान करने से आसानी से बढ़ता है। न कोई टानिक लेने की जरूरत और न कोई उपचार करने की। चिकित्साविदों और शरीर शास्त्रियों का मानना है कि मस्तिष्क के काम करने की प्रकिया लोगों में उनके कामकाज और व्यवहार के अनुसार अलग अलग होती है।
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आपके दिमाग पर असर

एक खिलाड़ी का मस्तिष्क एक कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले से सर्वथा भिन्न दिखाई देता है। हर व्यक्ति के मस्तिष्क की प्रक्रिया बहुत कुछ अलग होती है। लेकिन ध्यान के जरिए उस प्रकिया को स्वस्थ और ऊर्जावान रखा जा सकता है।

इलिनॉयस यूनिवर्सिटी में विलियम ग्रीनो और उसके साथियों द्वारा की गई एक अन्य रिसर्च के अनुसार मस्तिष्क के उन भागों में नाटकीय बदलाव दिखाई होते हैं जो तालमेल बिठाने में सक्रिय होते हैं।

और तालमेल बिठाने में ध्यान असाधारण रूप से सहायक होता है। यही कारण है कि घ्यान का नियमित अभ्यास करने वाले सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा सुलझे और सहज होते हैं।
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