मन में कोई विचार यूं ही नहीं आ जाता। जो भी विचार आता है, वह कितना ही ऊलजलूल हो वाकई उसका वजूद रहता है। वह अजूबा इसलिए लगता है कि हमारी स्मृति में वह संचित विचारों से मेल नहीं खाता। क्वांटम भौतिकी की नवीनतम जानकारियों का हवाला देते हुए डोरा कोहेन ने हाल ही में कोरनेल यूनिवर्सिटी न्यूयार्क मे एक व्याख्यान दिया।
क्वांटम भौतिकी की संभावनाओँ के बारे में उन्होंने कहा कि अगर आपके मन में इंसान की तरह बोलते बतियाते चूहे का विचार आता है तो यकीन मानिए वैसा कहीं न कहीं होगा। दुनिया बहुत बड़ी है। अभी हम उसी के बारे में ठीक से नहीं जान पाए।
दिखाई या महसूस होने वाली दुनिया की तरह अरबों खरबों गुना विस्तार वाले ब्रह्मांड के बारे में पता लगना या जानना तो और भी मुश्किल है। लेकिन दुनिया में नया कुछ नहीं हो रहा। जो हो रहा है वह इसी मायने में नया है कि हम उसे याद नहीं कर पा रहे।