फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खूब पढ़े लिखे लोग आखिर पागल क्यों लगने लगते हैं?

विज्ञापन
विज्ञापन
जिन्हें आमतौर पर सनकी समझा जाता है, जरूरी नहीं कि वे भटके हुए लोग हों। तथ्य यह सामने आया है कि सनकी समझे जाने वाले लोगों में ज्यादातर प्रतिभाशाली लोग होते हैं। वे सनकी या भटके हुए इसलिए समझे जाते हैं कि उनका व्यवहार, रहन सहन और काम करने का ढंग सामान्य लोगों से अलग होता है।
विज्ञापन


मिशिगन यूनिवर्सिटी, अमेरिका के मन:शास्त्रविभाग के प्रमुख ओलिवर होम्स की देखरेख में हुए एक अध्ययन के मुताबिक नब्बे से पंचानवे प्रतिशत प्रतिभाशाली लोग व्यक्तित्व से असहज लगते हैं। असहज अर्थात वे दुनियादार और कामयाब लोगों से अलग तरह के होते हैं। यूनिवर्सिटि के करीब 35शोधछात्रों ने प्रो. होम्स के निर्देशन में प्रसिद्ध विभूतियों का अध्ययन किया।

इसलिए विद्वान व्यक्ति पागल लगने लगते हैं

उस अध्ययन के अनुसार ‘प्रतिभावान एक सीमा तक पागल होते हैं। वे अपनी सनक को इस कदर सही मानते हैं कि उन्हें यथार्थता के रूप में अनुभव करने लगते हैं। अध्ययन के अनुसार प्रतिभाशाली व्यक्ति एक सनक की पूर्ति में अपनी समग्र मानसिक चेतना झोंकनी पड़ती है।

इसका परिणाम यह होता है कि विभिन्न प्रयोजनों में काम करने वाली मानसिक क्षमताएं जब एक केन्द्र पर केन्द्रीभूत होती हैं, तो वे उस प्रयोजन में तो असाधारण रूप से सफल होते हैं किन्तु मस्तिष्कीय क्षमता के अन्य क्षेत्र में अविकसित रह जाते हैं। नतीजतन उनके दैनिक जीवन की सामान्य प्रवृत्तियासीमित एवं अस्त-व्यस्त रह जाती हैं।

सनकी मानने लगते हैं लोग

कोई सर्वांगीण प्रतिभावान नहीं होता वरन् किसी दिशा विशेष में ही उनका चिन्तन तल्लीन रहने से उसी सीमा तक सीमित रह जाता है। फलतः उनके दैनिक जीवन की गतिविधियों को देखकर लोग जहाँ सनकी मानने लगते हैं। वहां उनकी कार्य विशेष में अद्भुतता की छाप भी मानते हैं।

अध्ययन के अनुसार प्रतिभावान व्यक्ति अपने काम इतनी लगन और और उत्साह से करते हैं कि सचमुच पागल नहीं होते। वे अपने कामों को इस लगन और उत्साह से करते हैं कि और तथ्यों की उपेक्षा करने लगते हैं। ऐसे तथ्य जो दूसरों की दृष्टि से किसी सुयोग्य व्यक्ति में अनिवार्य रूप से होने चाहिए।

विज्ञापन

आइंस्टीन के जीवन की एक मजेदार घटना

अध्ययन में फ्रांस के साहित्यकार एलनेजेक्टर डयूमा, मोपासां, वालट स्काट, अंग्रेज कवि शैली आदि का स्वभाव और आदतें शामिल हैं। प्रसिद्ध वैज्ञानिक और मनीषी आइन्स्टीन के जीवन की एक घटना का जिक्र भी अध्ययन में किया गया है। घटना बहुतों को पता होगी कि आइंस्टीन एक मित्र के यहां रात्रि भोज पर गए। उन्हें जल्दी वापस लौटना था।

पर वे समझ बैठे कि यह घर मेरा है और मित्र दावत पर आए हैं। वे बार-बार घड़ी देखते। बहुत देर हो गई तो उनने अपने मित्र को पधारने तथा इतना समय देने के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें फिर कभी पधारने की बात कहकर विदाई शिष्टाचार निभाया।

जब मित्र हंस पड़े तो उन्हें पता चला कि यह उस मित्र का घर है और यहां में ही निमन्त्रित हूं। आइंस्टीन ही क्या इस तरह की घटनाएं कितने ही प्रतिभाशाली लोगों के बारे में विख्यात है। प्रो. होम्स की मानें तो करीब सभी लोगों के बारे में। कहीं ऐसा तो नहीं कि जितने भी असहज लोग मिलते हैं वे सभी किसी प्रतिभा के धनी हों और उसे निखरने का मौका न मिल रहा हो। इसलिए किसी भी व्यक्ति के सनकी जैसा दिखाई देने पर सावधान रहें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें