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भगवान को भोग लगाकर भोजन करने के बड़े हैं फायदे

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यह कोरी कल्पना नहीं है कि भगवान को समर्पित करने के बाद भोजन करने से उसके दोष विकार दूर हो जाते हैं। रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ स्पिरिचुअल साइंस बंगलूरू के अनुसंधान कर्ताओं ने तीस व्यक्तियों पर एक प्रयोग किया और पाया कि एक जैसा भोजन करने पर भी उसकी विधि और भावना का असर पड़ता है।
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यह असर अलग अलग होता है। उदाहरण के लिए तीस में से बारह लोगों को कहा गया कि वे भोजन शुरु करने से पहले भगवान को भोग लगाया करें, आठ लोगों से बिना भोग लगाए भोजन कराया गया और दस लोगों को चलते फिरते भोजन करने के लिए कहा गया।

सात सप्ताह तक किए इस प्रयोग में अभ्यासियों के स्वास्थ्य का अध्यययन किया गया है।

भगवान को भोग लगा कर भोजन करने का प्रभाव

जिन लोगों ने भगवान को भोग लगा कर भोजन किया था, उन्होंने सत्तर प्रतिशत से ज्यादा आहार अच्छी तरह पचा लिया। भोग नहीं लगा कर सामान्य तरह से भोजन करने वालों और जिस तिस तरह भोजन कर लेने वालों की सेहत और पाचनशक्ति पर प्रतिकूल असर पडा़।

भगवान को भोग लगाकर भोजन करने के अनुकूल होने की वजह मनोवैज्ञानिक भी है। डॉ वसंत के. बिल्लोरी के अनुसार जो कुछ खाया जा रहा है किसी उच्च आध्यात्मिक सत्ता को भोजन समर्पित करने से मन यह महसूस करने लगा कि उसने अलाएं बलाएं सब भगवान पर छोड़ दी। यह अनुभूति भी भोजन के नाकारात्मक गुणों को कम कर देती है।
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क्यों होता है भोग लगाकर भोजन करने से लाभ

प्राचीन आहार शास्त्रियों ने भोजन के साथ पवित्रता के कई नियम उपनियम बनाए हैं। उसकी वजह जो भी हो लेकिन डा. बिल्लोरी का मानना है कि उन नियमों का पहला असर मन में यह अहसास जगाने के लिए बहुत बड़ा कारण बनता है कि जो खाया जा रहा है, उसका असर दुनिया में सूक्ष्म शक्तियों पर भी होना है। अगर कोई बुरा असर होता है तो उन सूक्ष्म शक्तियों पर पहले होगा। और साधक उनके बुरे प्रभाव से बच जाएगा।

अनुसंधान में इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले कि भोग लगा कर किया गया भोजन किन्ही आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। लेकिन प्रत्येक वस्तु प्रसाद मान कर लेने से व्यक्ति का भोजन अधिक सात्विक और स्वच्छ होने लगता है।

सामान्य जीवन में भी किसी वरिष्ठ व्यक्ति की मौजूदगी भी शरीर और मन की स्थिति को प्रभावित करती है। भगवद्भाव को आमंत्रित और स्थापित करने के प्रमाण तो प्रयोगों और वैज्ञानिक कसौटियों पर भी खरे उतर रहे है।
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