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सपनों के ऐसे चमत्कार जिनसे आप भी बदल सकते हैं अपनी दुनिया

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जिस तरह पदार्थ सूक्ष्म कणों से बना है, उसी तरह  प्रकाश भी सूक्ष्म ऊर्जा कणों से बना है। ये ऊर्जाकण निश्चित मात्रा में प्रवाहित होते रहते हैं। यह पता लगने के बाद पिछले सौ वर्षों में विज्ञान की दुनिया ही बदल दी।
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जानकार हैरानी होगी कि इस तथ्य का पता म्यूनिख विश्वविद्यालय से विज्ञान पढ़ा रहे मैक्स प्लैंक के सपने से हुआ था। इसके बाद तो आकाश में आवाज से भी तेज चलने वाले विमान और अंतरिक्ष में विद्युत तंरगों से होड़ लेने वाले यान दौड़ने लगे।

इक्कीस वर्ष की आयु में भौतिक शास्त्र में पीएचडी करने के बाद वहीं पढ़ाने लगे प्लैंक के मन में नया कुछ करने की धुन थी, जिससे मनुष्य जाति कृतकृत्य हो जाए। बीस साल तक वे प्रयोगशाला में शोध प्रयासों में लगे रहे। प्रयोग, परीक्षण और अनुसंधान में दिन रात जुटे रह कर भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
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सपनों का चमत्कार

लगभग बीस साल लगे रहने पर भी कोई सार्थक निष्कर्ष नहीं निकल सका था। प्लैंक सोचने लगे थे कि क्या बीस सालों का श्रम यूं ही निरर्थक चला जाएगा। सन् 1900 के अक्टूबर महीने में एक सपने ने उनके सामने वह रहस्य ला कर रख दिया जिसने पदार्थ की तरह ऊर्जा के लोक का भी अस्तित्व सिद्ध कर दिया।

आज हम जिन खोजों, प्रयोगो और आविष्कारों से मनुष्य जाति को समृद्ध होता देख रहे हैं, वह प्लैंक की तरह और लोगों द्वारा भी देखे गए सपनों का चमत्कार है।

आप सोच भी नहीं सकते इनकी खोज सपने में हुई थी

1903 में राइट ब्रदर ने हवाई जहाज बना कर उड़ा दिया तो उसकी सूझ भी सपने से ही आई थी। सिलाई मशीन बना लेने के बाद उसकी सूई बनाने की तकनीक भी इलियास होवे के सपने में ही क्लिक हुई थी।

बंदूक की गोलियों, अणु को तोड़कर बम बना लेने और पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पुरखों की विरासत साथ लेकर जन्म लेने और अपनी अलग पहचान भी रखने वाले गुणसूत्र (डीएनए) का पता, फिर फेड्रिक ओगस्ट द्वारा बेनजीन जैसा जटिल रासायनिक फार्मूला तैयार करने जैसे चमत्कारों की भी सपने के आभारी ही माना जाता है।
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सपने में पता चला मनुष्य से जुड़ा यह रहस्य

जैम्स वॉटसन जिन्होनें अपने मित्र फ्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डी.ए.नए की खोज की थी, का कहना था कि उन्होंने अपने सपने में ढेर सारी स्पायरल सीढियां देखी थी जिस कारण ये बेहतरीन खोज वे कर पाए।

जो सत्य, तथ्य और रहस्य जागती हुई अवस्था में लाख सिर खपा कर भी हाथ नहीं आते वे सपने की एक झलक से उजागर हो जाते हैं।

इस सचाई का एक ही अर्थ है कि मनुष्य सबसे बड़ा चमत्कार है। अध्यात्म इस निष्कर्ष पर लाकर छोड़ देता है कि एक मनुष्य इतना चमत्कारी हो सकता है तो संसार में फैले छह अरब लोग अपने भीतर क्या क्या संभावनाएं लिए हुए होंगे?

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