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आखिर ऊपरी मंजिलों पर अकेले जाने से क्यों लगता है डर?

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सार्वजनिक स्थानो पर तो डर की बात समझ आती है, पर ऊंची जगहों पर जहां कोई नहीं होता वहां लोग क्यों डरते हैं।
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पाया गया है कि नब्बे प्रतिशत से ज्यादा लोग चौथी मंजिल की छत पर अकेले जाने, रहने और मुंडेर से नीचे झांकने से डरते हैं। उन्हें अनजाने ही यह डर सताता है कि वहां से गिर जाएंगे। या कोई धक्का दे देगा।

महिलाओं को रहता है अधिक डर

वैज्ञानिक मानते हैं कि इस तरह का डर व्यक्ति के भीतर समाए डर की ग्रंथि का परिचायक है। फोबिया नाम के मनोरोगों में से एक है अपने आपके मिट जाने का यह डर।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह अधिक होता है। यह संवेदनशीलता की पहचान है। संवेदनशील पुरुष भी इस रोग की चपेट में आते हैं।

जिन्हें डर नहीं सताता है

मनस्विदों के अनुसार फोबिया का एक रूप सबसे ज्यादा लोगों को सता रहा है। मजे की बात है कि दोनों तरह का फोबिया लोगों के संसर्ग से संबंधित है। एक फोबिया एकांत से जुड़ा है। ऊंचाई या खुले स्थान पर जाने से डरने वाली स्थिति को मोनोफोबिया कहते हैं।

दूसरी तरह को मनोरोगियों को लोगों के बीच जाने से डर लगता है। इस विकार को एग्रोफोबिया कहते हैं। करीब साठ प्रतिशत व्यक्ति उसके शिकार होते हैं। महिलाओं की संख्या पुरुषों से चालीस प्रतिशत तक ज्यादा होती है। बच्चों और चालीस वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों में यह शिकायत प्राय:नहीं होती।

एकांत में मिलने पर खुद के नष्ट हो जाने का डर

दक्षिण अफ्रीका के मनोचिकित्सक जोसेफ बोल्प को अनुसार इस समस्या या रोग का निवारण किसी ऐसे विश्वास या आस्था में ही है, जो व्यक्ति को आश्वस्त रखती हो। वरना नब्बे प्रतिशत लोग एकांत में मिलने पर खुद के नष्ट हो जाने की आंशका से पीड़ित रहते हैं।

योग दर्शन के अनुसार इस तरह अपने नष्ट हो जाने के भय को आभिनिवेश कहते हैं। इसे फोबिया नाम भी दिया गया है। योगी हरिहरानंद आरण्यक के अनुसार इनका उपचार करने की बजाय अपने भीतर ही ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि उपचार के बजाए इनका निराकरण ही हो जाए।
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इस तरह डर पर विजय पा सकते हैं

आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मनश्चिकित्सा विभाग के प्रोफसर आरके पंचोली के अनुसार आश्वस्त करने वाला मनोबल इस तरह के भयों की चिकित्सा का मूलमंत्र है।

उनकी देखरेख में हुए एक अध्ययन के अनुसार नियमित रूप से पूजा पाठ, ध्यान और स्वाध्याय करने वाले लोगों को इस तरह के अनजाने भय या फोबिया का शिकार नहीं होना पड़ता।
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