गांव कसबों में जैसे जैसे बिजली की रोशनी से रात गुलजार होने लगी और शिक्षा ने किसी भी हद तक मन का अंधेरा दूर करने में कामयाबी हासिल की, वैसे वैसे भूत प्रेतों की संख्या या उनके ठीये ठिकाने कम होने लगे हैं।
तेलंगाना के नलगोंडा जिले में आत्माओं और भूतप्रेतों पर आठ साल से खोज करती रही इलोरा देवांगन का कहना है कि 1950 तक जिन जगहों पर लोग जाते हुए डरते थे, तीस पैंतीस साल पहले जाने तो लगे पर रात को उधर जाने से हिचकिचाते थे। आज उन इलाकों में लोग कच्चे पक्के और फ्लैट मकान बना कर रहने लगे हैं।
इलोरा ने आठ साल के इस खोज अभियान में करीब 28 हजार किलोमीटर का इलाका छान मारा। इन यात्राओँ में उन्होंने कभी रहे और अब भी कायम मरघटों और कब्रिस्तानों तथा भुतहा हवेलियों और पेड़ों को देखा। हर जगह एक बात सामान्य लगी कि कुछ लोगों को भूत प्रेत की बाधाएं महसूस होती है और कुछ को नहीं। इलोरा की तरह औरों को भी लग सकता है कि भूत प्रेत वाकई हैं लेकिन वह सभी को क्यों दिखाई नहीं देते?